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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: संतोष दुबे ने उठाए 1250 पूजित धातु शिलाओं और दान राशि की पारदर्शिता पर सवाल

धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने दावा किया है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1989 में एकत्र की गई करीब 1250 सोने, चांदी और अष्टधातु की पूजित शिलाएं अब सार्वजनिक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देतीं। उन्होंने मंदिर आंदोलन से जुड़े दान और चढ़ावे की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रोहित शर्मा

रोहित शर्मा

संपादक

16 जून 2026 अपडेट 1 घंटे पहले2 मिनट पढ़ें 1.3K
राम मंदिर चढ़ावा विवाद: संतोष दुबे ने उठाए 1250 पूजित धातु शिलाओं और दान राशि की पारदर्शिता पर सवाल

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान एकत्र की गई कथित बहुमूल्य शिलाओं और मंदिर को प्राप्त दान की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि वर्ष 1989 में देश-विदेश से श्रद्धालुओं द्वारा भेजी गई लगभग 1250 सोने, चांदी, अष्टधातु तथा रत्नजड़ित पूजित शिलाएं अब सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं देतीं।

संतोष दुबे के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन को गति देने के लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा 1989 में देशव्यापी अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान श्रद्धालुओं से "रामशिला" और आर्थिक सहयोग एकत्र किया गया। उनका कहना है कि उन्हें उस समय कारसेवकपुरम में आने वाली बहुमूल्य शिलाओं का रिकॉर्ड तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

दुबे का दावा है कि इन शिलाओं में सोने, चांदी और अष्टधातु से निर्मित विशेष शिलाएं शामिल थीं। उनके अनुसार, कुछ शिलाएं विदेशों से भी भेजी गई थीं, जिनमें मॉरीशस से आई शिला तथा मुंबई के एक व्यापारी द्वारा भेजी गई हीरे जड़ित शिला विशेष रूप से उल्लेखनीय थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन शिलाओं को कारसेवकपुरम में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया था और जिस स्थान पर इन्हें रखा गया था वहां तीन ताले लगे हुए थे। उनके अनुसार वर्ष 2002 तक ये शिलाएं मौजूद थीं, लेकिन उसके बाद उनका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया।

संतोष दुबे ने यह भी दावा किया कि कारसेवकपुरम में स्थापित राम मंदिर मॉडल के सामने रखी गई दान पेटी में बड़ी मात्रा में धनराशि जमा होती थी, लेकिन उस धन के उपयोग और लेखा-जोखा को लेकर भी पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि वर्ष 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के समय पूर्व न्यास की संपत्तियों और बहुमूल्य शिलाओं का विस्तृत उल्लेख सामने क्यों नहीं आया। साथ ही उन्होंने मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान राशि के आंकड़ों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या संबंधित पदाधिकारियों की ओर से इस समाचार के प्रकाशन तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और मंदिर को मिलने वाले दान तथा चढ़ावे को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा होती रही है। अब संतोष दुबे के इन आरोपों के बाद एक बार फिर मंदिर आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों और वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा चर्चा में आ गया है।

रोहित शर्मा

संपादक

रोहित शर्मा

दो दशक से अधिक का अनुभव। संसद और राज्य की राजनीति पर पैनी नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार।

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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