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बांग्लादेश ने भारत की जगह चीन को सौंपा मोंगला पोर्ट प्रोजेक्ट, भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर बढ़ी चिंता

बांग्लादेश ने भारत के बजाय चीन को मोंगला पोर्ट और उससे जुड़े आर्थिक क्षेत्र के विकास का प्रोजेक्ट सौंप दिया है। साथ ही चीन तीस्ता नदी प्रबंधन में भी भागीदारी करेगा। यह घटनाक्रम भारत की समुद्री सुरक्षा, 'चिकन नेक' कॉरिडोर और पूर्वोत्तर राज्यों की रणनीतिक स्थिति के लिए नई चुनौती माना जा रहा है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor in chief

28 जून 2026 अपडेट 1 दिन पहले3 मिनट पढ़ें 408
बांग्लादेश ने भारत की जगह चीन को सौंपा मोंगला पोर्ट प्रोजेक्ट, भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर बढ़ी चिंता

बांग्लादेश का बड़ा फैसला, चीन को मिला मोंगला पोर्ट प्रोजेक्ट बांग्लादेश ने भारत की जगह चीन को मोंगला पोर्ट के आसपास आर्थिक क्षेत्र (Economic Zone) विकसित करने का प्रोजेक्ट सौंप दिया है। यह फैसला प्रधानमंत्री तारिक रहमान की 22 से 26 जून 2026 तक की चीन यात्रा के दौरान लिया गया। इसी दौरान चीन और बांग्लादेश के बीच कई रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें मोंगला पोर्ट, चटगांव इंडस्ट्रियल जोन और तीस्ता नदी प्रबंधन प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल आर्थिक साझेदारी नहीं बल्कि दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव का संकेत भी है।

क्या है मोंगला पोर्ट प्रोजेक्ट?

मोंगला बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है। वर्ष 2015 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते के तहत भारत को मोंगला और चटगांव में विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित करने की जिम्मेदारी मिली थी। भारत की ओर से हीरानंदानी समूह की कंपनी इस परियोजना पर काम करने वाली थी, लेकिन राजनीतिक बदलाव और परियोजना में देरी के कारण यह आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ समझौता समाप्त कर चीन की सरकारी कंपनी China Civil Engineering Construction Corporation (CCECC) को यह परियोजना सौंप दी।

चीन मोंगला पोर्ट पर क्या करेगा?

नई योजना के तहत चीन मोंगला पोर्ट का व्यापक आधुनिकीकरण करेगा। मुख्य कार्यों में शामिल हैं— दो नई कंटेनर जेटियों का निर्माण आधुनिक कंटेनर यार्ड स्वचालित (ऑटोमेटेड) कार्गो क्रेन सिस्टम बंदरगाह की क्षमता लगभग ढाई गुना बढ़ाना पोर्ट के पास 110 एकड़ में आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उद्योग स्थापित करना बड़े वेयरहाउस और लॉजिस्टिक हब बनाना

तीस्ता नदी परियोजना में भी चीन की एंट्री

चीन केवल मोंगला तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों के संयुक्त बयान में चीन द्वारा तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना में सहयोग देने की भी घोषणा की गई है। तीस्ता नदी भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश जाती है। जिस क्षेत्र में परियोजना प्रस्तावित है, वह भारत के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के काफी निकट स्थित है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

1. कूटनीतिक झटका शेख हसीना सरकार के समय जिन परियोजनाओं पर भारत को प्राथमिकता दी गई थी, वे अब चीन को मिल गई हैं। इसे दक्षिण एशिया में भारत के प्रभाव को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। 2. बंगाल की खाड़ी में चीन की मजबूत मौजूदगी यदि चीन मोंगला पोर्ट का विकास करता है तो भविष्य में वहां उसकी रणनीतिक और नौसैनिक मौजूदगी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बंगाल की खाड़ी में भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। 3. 'चिकन नेक' पर रणनीतिक दबाव तीस्ता परियोजना और लालमनिरहाट क्षेत्र में चीन की संभावित गतिविधियां भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं। यह कॉरिडोर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण भू-मार्ग है। 4. व्यापारिक नुकसान यदि मोंगला पोर्ट भारत के प्रबंधन में आता तो पूर्वोत्तर राज्यों तक माल ढुलाई की लागत काफी कम हो सकती थी। अब चीन की मौजूदगी के कारण भारत इस संभावित व्यापारिक लाभ से वंचित रह सकता है।

भारत की रणनीति क्या होगी?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रहा है। इनमें प्रमुख हैं— अंडमान-निकोबार में सैन्य क्षमता बढ़ाना INS वर्षा नौसैनिक अड्डे का विकास मॉरीशस के अगालेगा द्वीप पर सामरिक सुविधाएं इंडोनेशिया, ओमान, जापान, वियतनाम और अन्य देशों के साथ समुद्री सहयोग हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर लगातार निगरानी

निष्कर्ष

बांग्लादेश द्वारा मोंगला पोर्ट और तीस्ता परियोजनाओं में चीन को प्राथमिकता देना दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति का संकेत माना जा रहा है। हालांकि अभी इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास बताया जा रहा है, लेकिन भारत के रणनीतिक विशेषज्ञ इसे सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम मान रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं की प्रगति भारत-चीन-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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