राजस्थान: सरकारी स्कूलों की मरम्मत में 503 करोड़ के कथित घोटाले पर कांग्रेस हमलावर, उच्च स्तरीय जांच की मांग
Rajasthan school repair scam 503 crore fudge investigation demand by Congress leaders. बच्चों की सुरक्षा पर सफेदी करने वाली भ्रष्ट भाजपा सरकार को शर्म आनी चाहिए। एक साल बीतने को है, लेकिन ये तस्वीर बता रही है कि भाजपा सरकार ने झालावाड़ दुखांतिका से कोई सबक नहीं लिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सरकारी स्कूलों की मरम्मत में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप
राजस्थान में सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए आवंटित 503 करोड़ रुपये के बजट में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। इस मामले के उजागर होने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए इसे मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करार दिया है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
आरोप है कि प्रदेश के हजारों स्कूलों में मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। कई स्थानों पर जर्जर छतों को बदलने या उन्हें मजबूत करने के बजाय केवल रंग-रोगन कर दिया गया। कागजों में काम पूरा दिखाकर सरकारी खजाने से बड़ी राशि का भुगतान भी उठा लिया गया, जबकि धरातल पर काम की गुणवत्ता बेहद खराब रही या फिर काम हुआ ही नहीं।
कांग्रेस नेताओं ने सरकार को घेरा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से हुई सात बच्चों की मौत के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि जयपुर, दौसा, नागौर और अजमेर सहित कई जिलों में स्कूलों की दरारों को केवल पेंट से ढककर लाखों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है।
वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है। पायलट ने कहा कि यदि मरम्मत कार्य पूरा किए बिना ही भुगतान जारी किया गया है, तो यह वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ हजारों छात्रों और शिक्षकों की जान जोखिम में डालने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
विपक्ष की मांग: मुख्यमंत्री तुरंत करवाएं जांच
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार इस सरकार की पहचान बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं और किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। जूली ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 503 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके।
गौरतलब है कि पिछले साल झालावाड़ के पिपलोदी में स्कूल की छत गिरने की हृदयविदारक घटना के बाद सरकार ने जर्जर भवनों को सुरक्षित बनाने के लिए यह विशेष बजट जारी किया था। आदेश दिए गए थे कि 20 हजार से अधिक स्कूलों की जर्जर छतों को हटाकर उन्हें मजबूत किया जाए। हालांकि, अब सामने आए तथ्यों ने सरकारी दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
क्या है आगे की स्थिति?
फिलहाल, इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। विपक्ष का कहना है कि यदि सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे बड़े स्तर पर उठाएंगे। अभिभावकों में भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मामले में कोई उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करती है या यह मामला केवल राजनीतिक बयानों तक ही सीमित रह जाता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
