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हिसार: नवजात की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, हरियाणा सरकार से मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हिसार और रोहतक के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर न मिलने के कारण एक नवजात की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
हिसार: नवजात की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, हरियाणा सरकार से मांगी रिपोर्ट
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वेंटिलेटर के अभाव में गई नवजात की जान, आयोग ने लिया संज्ञान

हरियाणा के हिसार और रोहतक के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी के कारण एक नवजात शिशु की दुखद मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और लापरवाही के पहलुओं पर जवाब मांगा गया है।

घटना की शुरुआत बुधवार दोपहर को हुई, जब बिहार के औरंगाबाद निवासी राकेश कुमार की पत्नी पूजा को प्रसव पीड़ा के चलते हिसार के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। सिजेरियन डिलीवरी के बाद जन्मे नवजात को जन्म के एक घंटे के भीतर ही सांस लेने में गंभीर समस्या होने लगी। उसे तुरंत अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में शिफ्ट किया गया, लेकिन वहां मौजूद एकमात्र वेंटिलेटर पहले से ही किसी अन्य मरीज के उपयोग में था।

अस्पतालों के बीच भटकता रहा परिवार

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें समय रहते उचित उपचार नहीं दिया। डॉक्टरों ने पहले अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर की उपलब्धता की जांच की, लेकिन वहां भी सुविधा न मिलने पर बच्चे को 106 किलोमीटर दूर रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया। बुधवार शाम को रोहतक पहुंचने के बाद भी बच्चे को तुरंत वेंटिलेटर नहीं मिल सका और उन्हें रातभर इंतजार करने को कहा गया।

अगली सुबह भी जब रोहतक पीजीआई में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं हो सका, तो डॉक्टरों ने बच्चे को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी। हार मानकर परिजन वापस हिसार लौटे और एक निजी अस्पताल का रुख किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और नवजात ने दम तोड़ दिया। पिता राकेश कुमार का कहना है कि यदि सरकारी तंत्र में समय पर वेंटिलेटर मिल जाता, तो उनके बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

अस्पताल प्रशासन की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

हिसार नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. रीना जैन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि एनआईसीयू में केवल एक ही वेंटिलेटर उपलब्ध है, जो उस समय व्यस्त था। उन्होंने स्वीकार किया कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी वेंटिलेटर खाली नहीं था, जिसके चलते बच्चे को बेहतर इलाज की उम्मीद में रोहतक भेजा गया था। यह घटना सरकारी अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी को दर्शाती है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या यह केवल संसाधनों की कमी थी या इसमें किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही भी बरती गई है। फिलहाल, यह मामला राज्य में नवजात शिशुओं के लिए उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की पोल खोलता नजर आ रहा है।

आने वाले दिनों में हरियाणा सरकार को यह बताना होगा कि राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर जैसे जीवन रक्षक उपकरणों की इतनी कमी क्यों है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है और इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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