पटना: पीएमसीएच में इलाज में लापरवाही का आरोप, नर्स के पति की मौत के बाद डॉक्टरों के खिलाफ प्रदर्शन
सोमवार को एक मरीज की मौत हुई थी, काफी हंगामा हुआ था। मृतक रामपुर डुमरा, मराची निवासी 55 वर्षीय अरविंद सिंह है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब नर्सिंग स्टाफ ने एक मरीज की मौत के बाद डॉक्टरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मृतक की पहचान मराची के रामपुर डुमरा निवासी 55 वर्षीय अरविंद सिंह के रूप में हुई है, जो अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठ नर्स लक्ष्मी कुमारी के पति थे। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं।
इलाज में लापरवाही और मारपीट का गंभीर आरोप
परिजनों के अनुसार, अरविंद सिंह को गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे मेडिकल इमरजेंसी यूनिट में भर्ती कराया गया था। मृतक के बेटे शिवम कुमार ने आरोप लगाया कि तीन दिनों तक चले इलाज के दौरान डॉक्टरों ने गंभीर लापरवाही बरती। शिवम का दावा है कि डायलिसिस के दौरान दवा के रिएक्शन से उनके पिता की तबीयत बिगड़ी, लेकिन बार-बार बुलाने के बावजूद कोई भी सीनियर डॉक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचा।
मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना का वीडियो बनाने और विरोध करने पर जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया। शिवम ने दावा किया कि उन्हें करीब एक घंटे तक बंधक बनाकर पीटा गया। इस दौरान जब उनकी मां और वरिष्ठ नर्स लक्ष्मी कुमारी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उनके साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया।
नर्सिंग स्टाफ का कार्य बहिष्कार और धरने पर प्रदर्शन
इस घटना के बाद पीएमसीएच की अन्य नर्सों ने अपनी सहयोगी के समर्थन में काम बंद कर दिया और अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गईं। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि यदि अस्पताल में वर्षों से सेवा दे रही एक वरिष्ठ नर्स के परिवार के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम मरीजों की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रदर्शनकारी नर्सों ने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। नर्सों के विरोध के कारण इमरजेंसी सेवाओं पर भी असर पड़ा, जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का आश्वासन दिया है ताकि विवाद को सुलझाया जा सके।
प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग
परिजनों ने आरोप लगाया है कि यदि समय रहते उचित उपचार मिलता, तो अरविंद सिंह की जान बचाई जा सकती थी। अस्पताल प्रबंधन अब इस मामले की आंतरिक जांच करने की तैयारी में है। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन और प्रदर्शनकारी नर्सों के बीच बातचीत का दौर जारी है। घटना के बाद से ही पीएमसीएच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अस्पताल में हुई इस घटना ने चिकित्सा जगत में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के बीच के संबंधों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर नर्सिंग स्टाफ अपनी मांग पर अड़ा हुआ है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!