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सहकारिता क्षेत्र में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि: ई-पैक्स के जरिए 10 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
सहकारिता क्षेत्र में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि: ई-पैक्स के जरिए 10 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन
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सहकारिता के क्षेत्र में राजस्थान ने देश भर में एक नई मिसाल कायम की है। हाल ही में आयोजित सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान राज्य की उपलब्धियों को विशेष रूप से सराहा गया। आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान की 5,646 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) अब पूरी तरह से ई-पैक्स में परिवर्तित हो चुकी हैं। इन समितियों के माध्यम से अब तक 10 करोड़ से अधिक ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं, जो पूरे देश में डिजिटल लेनदेन के मामले में एक बड़ी उपलब्धि है।

डेयरी क्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

राज्य में सहकारिता का दायरा काफी विस्तृत है। वर्तमान में 42 हजार से अधिक सहकारी समितियों से करीब 1.35 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। डेयरी क्षेत्र की बात करें तो इसने 10 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड टर्नओवर हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। दूध संकलन के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो 38 लाख लीटर से बढ़कर अब 45 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। आरसीडीएफ और जिला दुग्ध संघों का यह प्रदर्शन पिछले 47 वर्षों के इतिहास में सबसे बेहतर माना जा रहा है।

समारोह के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारी व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के समावेश से भुगतान प्रणाली में अभूतपूर्व पारदर्शिता आई है। डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने न केवल काम को आसान बनाया है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी न्यूनतम किया है। उन्होंने किसानों से जैविक खेती की ओर बढ़ने का आग्रह करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जमीन की उर्वरता घट रही है, जिसे बचाना अब समय की मांग है।

बुनियादी ढांचे का विस्तार और नई परियोजनाएं

राजस्थान में सहकारिता को मजबूत करने के लिए कई नई परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। राज्य में 10 नए अन्न भंडारण गोदामों का शिलान्यास किया गया है, जबकि 50 गोदामों का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। इसके अतिरिक्त, 100 गोदामों को राज्य भंडारण निगम को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की गई है। ये कदम किसानों को उनकी उपज के सुरक्षित भंडारण में बड़ी सहायता प्रदान करेंगे।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सहकारिता विभाग ने एक अनूठी पहल की है। जयपुर के सुमेल गांव में 64 एकड़ भूमि पर 'सहकार वन' विकसित किया जाएगा, जिसका ई-भूमि पूजन संपन्न हो चुका है। इस वन क्षेत्र में खेजड़ी, रोहिड़ा और नीम जैसे स्थानीय वृक्षों को मियावाकी और पारंपरिक पद्धतियों से लगाया जाएगा। यह परियोजना न केवल हरियाली बढ़ाएगी, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होगी।

भविष्य की राह और किसानों का सशक्तिकरण

सहकारिता मंत्रालय का लक्ष्य आने वाले समय में इन समितियों को और अधिक स्वावलंबी बनाना है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। सरकार का मानना है कि यदि किसान डिजिटल और जैविक खेती के प्रति जागरूक रहते हैं, तो उनकी आय में निश्चित रूप से वृद्धि होगी। राजस्थान सरकार ने इन सहकारी समितियों को केंद्र बिंदु मानकर कृषि विकास की एक नई रूपरेखा तैयार की है।

समारोह में उपस्थित विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि राजस्थान का मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। पैक्स का कंप्यूटरीकरण और उन्हें ई-पैक्स में बदलना एक क्रांतिकारी कदम रहा है। आने वाले दिनों में इन समितियों के माध्यम से किसानों को और भी कई नई सुविधाएं प्रदान करने की योजना है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सकेगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में मिल सकेगा।

कुल मिलाकर, राजस्थान में सहकारिता आंदोलन अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां तकनीक और परंपरा का मेल देखने को मिल रहा है। बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर डिजिटल लेनदेन तक, राज्य ने अपनी कार्यक्षमता को साबित किया है। आने वाले समय में 'सहकार वन' जैसी परियोजनाएं और गोदामों का विस्तार ग्रामीण राजस्थान की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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