डीग के लाल ने नासिक में गंवाई जान: 7 साल के बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि, सैन्य सम्मान के साथ विदाई
Deeg soldiers final rites with full military honors. जानकारी के अनुसार जवान बबलू चौधरी नासिक में तैनात थे। 5 जुलाई को ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान के डीग जिले के सिनसिनी गांव में उस समय मातम पसर गया जब सेना के एक जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। 26 वर्षीय बबलू चौधरी, जो भारतीय सेना में नायक के पद पर नासिक में तैनात थे, का हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। उनकी असामयिक मृत्यु ने न केवल उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
घटनाक्रम के अनुसार, 5 जुलाई को नासिक में ड्यूटी के दौरान बबलू चौधरी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। चिकित्सा रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है। इस दुखद समाचार के मिलते ही उनके परिवार और गांव में सन्नाटा पसर गया।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
मंगलवार को जब जवान का पार्थिव शरीर सिनसिनी गांव पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में पार्थिव देह को रखा गया, जहां जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पूरा क्षेत्र 'बबलू चौधरी अमर रहें' और 'भारत माता की जय' के नारों से गूंज उठा।
अंतिम संस्कार के समय का दृश्य अत्यंत हृदयविदारक था। जवान के 7 वर्षीय पुत्र यश कुमार और उनके छोटे भाई पंकज ने उन्हें मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने अपने साथी को अंतिम सलामी दी, जिसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।
देशभक्ति की विरासत और परिवार का दुख
बबलू चौधरी का परिवार देशभक्ति की परंपरा से जुड़ा रहा है। उनके पिता विजेंद्र सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं और उन्होंने देश की सेवा की है। बबलू के छोटे भाई पंकज भी वर्तमान में सेना में लांसनायक के पद पर कार्यरत हैं। बबलू चौधरी वर्ष 2016 में सेना में भर्ती हुए थे और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण गांव में बेहद लोकप्रिय थे।
जवान के परिवार में उनकी पत्नी मंजू और दो छोटे बच्चे, यश कुमार (7) और भावेश (3) हैं। 2018 में विवाह के बाद से ही बबलू अपने परिवार के लिए एक मजबूत स्तंभ थे। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रशासनिक अधिकारियों, जिनमें सीओ सीताराम बैरवा और तहसीलदार जुगिता मीणा शामिल थे, ने घर पहुंचकर शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी।
गांव में शोक का माहौल
सिनसिनी गांव के निवासियों ने बबलू चौधरी को याद करते हुए बताया कि वे एक बेहद सरल और मिलनसार व्यक्ति थे। उनकी मृत्यु से गांव ने एक होनहार बेटा खो दिया है। अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। प्रशासन ने भी इस कठिन समय में परिवार को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है।
यह घटना देश की रक्षा में तैनात जवानों के कठिन जीवन और उनके परिवारों के बलिदान को रेखांकित करती है। बबलू चौधरी की शहादत और उनके परिवार के प्रति पूरे क्षेत्र में सहानुभूति है। गांव के लोग अब इस बहादुर जवान की यादों को संजोए हुए हैं और उनके परिवार के साथ खड़े हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
