राहुल गांधी मानहानि मामला: सुल्तानपुर कोर्ट में सुनवाई टलने के आसार, 15 जुलाई को आएगा अहम फैसला
Sultanpur court hearing for Rahul Gandhi defamation case today. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की सुल्तानपुर के MPMLA कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होनी है। मामला केंद्रीय मंत्री अमित शाह पर दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में सोमवार को सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई होनी है। यह पूरा मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित विवादित टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया और पत्रावली के सत्र न्यायालय में होने के कारण आज की सुनवाई के टलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
रिवीजन याचिका पर टिकी है नजर
वर्तमान में यह मामला एक कानूनी मोड़ पर है। भाजपा नेता विजय मिश्र के वकीलों ने निचली अदालत के एक आदेश को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका (रिवीजन पिटीशन) दाखिल की है। दरअसल, निचली अदालत ने वादी पक्ष की उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी के बयानों की सीडी की आवाज का मिलान विधि विज्ञान प्रयोगशाला से कराने का अनुरोध किया गया था। इसी आदेश के खिलाफ अब एडीजे पंचम की अदालत में सुनवाई चल रही है।
अधिवक्ताओं के अनुसार, इस रिवीजन याचिका पर अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस पर अंतिम निर्णय 15 जुलाई को आने की उम्मीद है। जब तक सत्र न्यायालय इस याचिका पर अपना फैसला नहीं सुना देता, तब तक मूल मामले की सुनवाई आगे बढ़ना मुश्किल लग रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी की थी। इस बयान से आहत होकर सुल्तानपुर के स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्र ने दीवानी न्यायालय में परिवाद दाखिल किया था। अदालत ने इस शिकायत को संज्ञान में लेते हुए मामले को आगे बढ़ाने का आदेश दिया था।
इस कानूनी प्रक्रिया के तहत राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को सुल्तानपुर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जमानत प्राप्त की थी। इसके बाद 26 जुलाई 2024 को उन्होंने अदालत में अपना बयान भी दर्ज कराया था। राहुल गांधी की कानूनी टीम का मानना है कि यदि सत्र न्यायालय रिवीजन याचिका को खारिज करता है और वादी पक्ष उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है, तो भी मूल पत्रावली सत्र न्यायालय में होने के कारण निचली अदालत में कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।
कानूनी भविष्य और संभावनाएं
राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि मामले की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सोमवार की सुनवाई में कोई ठोस प्रगति होने की संभावना कम है। कानूनी जानकारों का कहना है कि 15 जुलाई को आने वाला फैसला इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा। यदि रिवीजन याचिका पर कोई बड़ा बदलाव आता है, तो साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी इस मामले में पहले भी कई बार अदालत में पेश हो चुके हैं। फरवरी 2026 में भी उन्होंने कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। फिलहाल, सभी की निगाहें 15 जुलाई की तारीख पर टिकी हैं, जब सत्र न्यायालय रिवीजन फाइल पर अपना निर्णय सुनाएगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
