कटनी: मानदेय और शोषण के खिलाफ सड़कों पर उतरीं आशा कार्यकर्ता, कलेक्ट्रेट का किया घेराव
Katni Asha workers protest low stipend, demand better policies. कटनी में आशा और आशा पर्यवेक्षक सहयोगिनी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अल्प मानदेय और शासन की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

अल्प मानदेय और विभागीय दबाव से नाराज हैं कार्यकर्ता
कटनी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और आशा पर्यवेक्षक सहयोगिनी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। बड़ी संख्या में जुटी महिला कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को लेकर डिप्टी कलेक्टर को 16 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि उन्हें बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है, जो उनके द्वारा किए जाने वाले कठिन परिश्रम के मुकाबले नगण्य है। यूनियन के पदाधिकारियों के अनुसार, विपरीत परिस्थितियों में 24 घंटे सेवाएं देने के बावजूद विभाग उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। मध्य प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं को वर्तमान में केवल 6 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में यह राशि 10 हजार रुपये से अधिक है।
वेतन विसंगतियों और कटौती से बढ़ा आक्रोश
कार्यकर्ताओं ने वेतन भुगतान में व्याप्त गंभीर विसंगतियों को उजागर किया है। उनका कहना है कि वेतन का भुगतान समय पर नहीं होता और अक्सर तीन से चार महीने तक रोक लिया जाता है। इसके अलावा, वेतन भुगतान के साथ कोई सैलरी स्लिप भी नहीं दी जाती, जिससे पारदर्शिता का अभाव बना रहता है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रविवार या अन्य शासकीय अवकाशों के नाम पर मनमाने ढंग से वेतन काटा जाता है।
वर्ष 2023 में तय किए गए 15,000 रुपये के वेतन ढांचे में से 3,000 रुपये का यात्रा भत्ता समाप्त कर दिया गया, जिससे पर्यवेक्षकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। 10 से 15 गांवों का भ्रमण करने वाली इन महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा यात्रा खर्च में ही समाप्त हो जाता है। साथ ही, वर्ष 2024 से रुकी हुई वार्षिक वेतन वृद्धि ने भी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष पैदा किया है।
गैर-विभागीय कार्यों के लिए मिल रही धमकियां
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यों के अलावा उन पर आयुष्मान कार्ड बनाने और चुनावी ड्यूटी जैसे गैर-विभागीय कार्यों का भारी दबाव बनाया जाता है। विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। इस डर के कारण कई कार्यकर्ताओं ने अपनी जेब से पैसे खर्च कर कंप्यूटर सेंटरों से आयुष्मान कार्ड बनवाकर विभाग को सौंपे हैं।
कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों में आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 26,000 रुपये और पर्यवेक्षकों को 35,000 रुपये का मासिक वेतन सुनिश्चित करना शामिल है। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक उन्होंने कम से कम 10,000 रुपये प्रतिमाह भुगतान की मांग की है। इसके अलावा, हर महीने की 5 तारीख तक वेतन भुगतान, सैलरी स्लिप की अनिवार्यता, यात्रा भत्ता बहाली और बिना जांच के सेवा समाप्ति पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
मांगें पूरी न होने पर काम ठप करने की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के बाद कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों का जल्द निराकरण नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो जिले भर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी जाएंगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
