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व्हाट्सएप पर चेयरमैन बनकर 5.30 करोड़ की ठगी, पुणे से गिरफ्तार आरोपी ने खोले थे फर्जी बैंक खाते

Rajasthan Cyber Crime bust 5.30 crore fraud Pune arrest. राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम शाखा ने कॉर्पोरेट कंपनियों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए महाराष्ट्र के पुणे से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 852
व्हाट्सएप पर चेयरमैन बनकर 5.30 करोड़ की ठगी, पुणे से गिरफ्तार आरोपी ने खोले थे फर्जी बैंक खाते
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चेयरमैन की डीपी लगाकर अकाउंटेंट को दिया झांसा

राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम शाखा ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने एक नामी कंपनी के चेयरमैन की पहचान का गलत इस्तेमाल कर 5.30 करोड़ रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया था। पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र के पुणे से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो गिरोह के लिए फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था।

मामले की शुरुआत 27 अप्रैल 2026 को हुई, जब गैलेक्सी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि दीपेंद्र सिंह ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, ठगों ने कंपनी के मालिक दीपेंद्र सिंह राठौड़ की फोटो और नाम का उपयोग करके एक व्हाट्सएप अकाउंट बनाया। इसके बाद उन्होंने कंपनी के अकाउंटेंट को संदेश भेजकर खुद को चेयरमैन बताया और अत्यंत जरूरी भुगतान का हवाला देते हुए दो अलग-अलग बैंक खातों में 5.30 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

दिहाड़ी मजदूर निकला बैंक खातों का सप्लायर

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी राहुल अशोक (32) मूल रूप से पुणे का रहने वाला है। पूछताछ में पता चला कि राहुल पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर है, लेकिन उसने अमित सिंह नामक व्यक्ति के प्रभाव में आकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक फर्जी फर्म का पंजीकरण करवाया था। इसी फर्म के नाम पर उसने बैंक में करंट अकाउंट खुलवाए थे।

पुलिस के अनुसार, इस फर्जी फर्म के खाते की क्रेडिट लिमिट को मिलीभगत से 50 करोड़ रुपये तक बढ़वाया गया था। मार्च 2026 में हुई ठगी की रकम इसी खाते में मंगवाई गई थी। आरोपी ने गिरोह के लिए तीन अन्य बैंक खाते भी खोल रखे थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम को लेयरिंग के जरिए इधर-उधर करने के लिए किया जाता था, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के बाद पुलिस टीम पुणे पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर ले आई। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी फर्म के नाम पर खाते खोलने और इतनी बड़ी क्रेडिट लिमिट स्वीकृत करने में बैंक के किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत तो नहीं थी।

यदि जांच के दौरान किसी बैंक कर्मी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की विशेष टीम अब इस गिरोह के सरगना अमित सिंह और अन्य फरार साथियों की तलाश में जुटी है। इस ऑपरेशन को स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर के डीएसपी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।

साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता जरूरी

यह मामला कॉरपोरेट जगत के लिए एक बड़ी चेतावनी है। ठगों ने केवल एक व्हाट्सएप प्रोफाइल फोटो का उपयोग करके कंपनी के कर्मचारी को गुमराह कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले संबंधित अधिकारी से सीधे फोन कॉल या व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करना अनिवार्य होना चाहिए, ताकि ऐसी डिजिटल धोखाधड़ी से बचा जा सके।

पुलिस ने आमजन और कॉरपोरेट संस्थाओं से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात नंबर से आए वित्तीय निर्देशों पर तुरंत भरोसा न करें। साइबर क्राइम से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर दें। फिलहाल, पुलिस गिरोह के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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