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टोंक: डमी अभ्यर्थी बैठाकर आरएसी कॉन्स्टेबल बनने का आरोप, 15 साल बाद पीठाधीश्वर पर FIR

Rajasthan Tonk Bhadrkali Temple head accused of getting constable job via dummy candidate. आरोपी श्रीराम मीणा टोंक के निवाई तहसील के कांटोली गांव का रहने वाला है। भर्ती में चयन के बाद भी उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 614
टोंक: डमी अभ्यर्थी बैठाकर आरएसी कॉन्स्टेबल बनने का आरोप, 15 साल बाद पीठाधीश्वर पर FIR
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राजस्थान के टोंक जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां भद्रकाली मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीराम मीणा पर आरएसी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में धांधली करने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि उन्होंने 15 साल पहले आयोजित हुई परीक्षा में अपनी जगह किसी और व्यक्ति को बैठाकर नौकरी हासिल की थी। इस मामले में एसओजी की जांच के बाद अब कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, यह मामला 2011 में हुई आरएसी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। श्रीराम मीणा पर आरोप है कि 23 जनवरी 2011 को टोंक के टैगोर बाल निकेतन स्कूल में आयोजित लिखित परीक्षा के दौरान उन्होंने खुद पेपर न देकर एक डमी अभ्यर्थी को बैठाया था। परीक्षा में चयन होने के बाद उन्होंने 2011 में दस्तावेज जमा किए और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2014 में उन्हें नियुक्ति मिली। तब से वे लगातार वेतन और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे।

इस मामले की शिकायत एसओजी को मिली थी, जिसके बाद प्रारंभिक जांच में आरोपों को सही पाया गया। एसओजी के निर्देश पर 9वीं आरएसी बटालियन के कमांडेंट राजेश चौधरी ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच कर रही है।

दस्तावेजों का होगा सत्यापन और हस्ताक्षरों का मिलान

जांच अधिकारी और थानाधिकारी भंवरलाल वैष्णव ने बताया कि पुलिस अब आरएसी मुख्यालय जयपुर से भर्ती से संबंधित सभी मूल दस्तावेज मंगवा रही है। मामले की पुष्टि के लिए आरोपी के वर्तमान हस्ताक्षरों का मिलान परीक्षा के समय किए गए हस्ताक्षरों से कराया जाएगा। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस फर्जीवाड़े में कोई संगठित गिरोह शामिल था या यह केवल व्यक्तिगत स्तर पर किया गया कृत्य था।

आरोपी श्रीराम मीणा पिछले काफी समय से चर्चा में रहे हैं। वे टोंक के कांटोली गांव स्थित प्राचीन भद्रकाली मंदिर के पीठाधीश्वर के रूप में अपनी पहचान रखते हैं और बड़ी संख्या में लोग उनके दरबार में आते हैं। उन पर नशामुक्ति और अन्य सामाजिक अभियानों के नाम पर सक्रिय रहने का दावा भी किया जाता है।

ड्यूटी से लंबे समय से हैं गैरहाजिर

आरोपी कॉन्स्टेबल की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, श्रीराम मीणा 14 सितंबर 2024 से बिना किसी पूर्व अनुमति के अपनी ड्यूटी से लगातार गैरहाजिर चल रहे हैं। उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर 16 सीसीए के तहत कार्रवाई भी प्रक्रियाधीन है। वर्तमान में पुलिस उनकी तलाश कर रही है ताकि उनसे पूछताछ की जा सके।

दूसरी ओर, आरोपी श्रीराम मीणा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वे 2006 से ही मंदिर में साधना कर रहे हैं और नौकरी उन्हें बाद में मिली थी। उन्होंने दावा किया कि पहले भी उन पर अनपढ़ होने और फर्जी तरीके से नौकरी पाने के आरोप लगे थे, लेकिन उस समय जांच के बाद ही उन्हें नियुक्ति दी गई थी। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे इस मामले में मानहानि का दावा भी करेंगे।

फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई जारी है और भर्ती के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर काफी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि एक सरकारी कर्मचारी और एक धार्मिक स्थल के पीठाधीश्वर का नाम इस तरह के गंभीर धोखाधड़ी के मामले में सामने आया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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