मुरैना में मानसून की सुस्त चाल: पिछले साल की तुलना में बारिश में भारी कमी, किसानों की बढ़ी चिंता
Monsoon slow in Morena. पिछले साल के मुकाबले 226.2 मिमी कम बारिश, किसानों को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मुरैना में मानसून की बेरुखी
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में इस वर्ष मानसून की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 6 जुलाई 2026 तक जिले में औसत बारिश का आंकड़ा मात्र 92.2 मिलीमीटर दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले काफी कम है, जिससे स्थानीय प्रशासन और कृषि क्षेत्र में चिंता का माहौल है।
पिछले साल इसी समयावधि के दौरान जिले में 318.4 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की गई थी। इस प्रकार, इस वर्ष अब तक पिछले साल की तुलना में 226.2 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। बारिश की यह कमी न केवल जल स्तर को प्रभावित कर रही है, बल्कि खरीफ फसलों की बुवाई और उनके विकास के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
तहसीलों में बारिश का असमान वितरण
जिले में मानसून का वितरण भी काफी असमान देखा जा रहा है। भू-संसाधन प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जौरा तहसील में अब तक सबसे अधिक 192 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि अंबाह तहसील में स्थिति सबसे खराब है, जहां केवल 44.5 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है। अन्य तहसीलों की बात करें तो कैलारस में 127 मिलीमीटर, पोरसा में 72.5 मिलीमीटर, सबलगढ़ में 60 मिलीमीटर और मुरैना तहसील में 57 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
6 जुलाई को जिले के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश हुई, जिसमें मुरैना तहसील में 19 मिलीमीटर, सबलगढ़ में 10 मिलीमीटर, पोरसा और कैलारस में 6-6 मिलीमीटर और अंबाह में मात्र 0.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, जौरा में उस दिन बारिश का कोई आंकड़ा दर्ज नहीं किया गया।
किसानों की उम्मीदें और कृषि पर प्रभाव
मानसून की इस सुस्ती का सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ रहा है। कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक संदीप तोमर के अनुसार, आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसान अभी भी अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि खेतों में नमी बनी रहे और सिंचाई की आवश्यकता पूरी हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि आने वाले समय में बारिश की संभावना बनी हुई है, लेकिन कुल वर्षा का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने के संकेत मिल रहे हैं। यह स्थिति किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि फसलों की पैदावार पूरी तरह से समय पर होने वाली वर्षा पर निर्भर करती है।
आगे की स्थिति
जिले में जल संरक्षण और कृषि प्रबंधन को लेकर अब प्रशासन और किसानों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। मानसून की अनिश्चितता के कारण फसल चक्र में बदलाव की संभावनाओं पर भी चर्चा की जा रही है। फिलहाल, पूरा जिला अच्छी बारिश के इंतजार में है ताकि खरीफ सीजन को नुकसान से बचाया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
