फरीदाबाद: सेक्टर-56 डंपिंग यार्ड के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा, निगम प्रशासन को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
Faridabad Sector 56 dumping yard closure demand intensifies. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि डंपिंग यार्ड में लगातार बढ़ते कूड़े के ढेर और वहां से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

फरीदाबाद के सेक्टर-56 में स्थित डंपिंग यार्ड को हटाने की मांग को लेकर स्थानीय निवासियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में प्रभावित क्षेत्र के लोग नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और मेयर प्रवीण बत्रा जोशी तथा निगम आयुक्त को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए एक ज्ञापन सौंपा। निवासियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर डंपिंग यार्ड को बंद करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
तीन साल से जारी है संघर्ष
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले तीन वर्षों से वे इस डंपिंग यार्ड के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। क्षेत्र के लोगों ने इस दौरान कई बार स्थानीय विधायकों, मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी पीड़ा से अवगत कराया है, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। अब निवासियों का धैर्य जवाब दे चुका है और उन्होंने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
प्रदर्शन में शामिल सुदेश ने बताया कि प्रतापगढ़ गांव, समयपुर और आसपास की कॉलोनियों के हजारों लोग इस डंपिंग यार्ड की दुर्गंध और गंदगी से सीधे तौर पर प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को सात दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो होने वाले किसी भी बड़े आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
बीमारियों का खतरा और बदतर होते हालात
स्थानीय निवासी महेश ने बताया कि डंपिंग यार्ड में हर दिन कूड़ा ढोने वाले डंपरों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जिससे इलाके में हर समय दुर्गंध का माहौल बना रहता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि बरसात के मौसम में यह गंदगी और भी घातक हो जाती है। कचरे के ढेर से रिसने वाला पानी और हवा में घुलती दुर्गंध के कारण क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
लोगों का कहना है कि घरों के भीतर रहना भी दूभर हो गया है। खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने के बावजूद दुर्गंध का असर कम नहीं होता। निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस डंपिंग यार्ड को किसी आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाए ताकि उन्हें स्वच्छ वातावरण मिल सके।
प्रशासन का रुख
नगर निगम की मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने निवासियों का ज्ञापन स्वीकार करते हुए उन्हें आश्वासन दिया है कि निगम प्रशासन इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा कि डंपिंग यार्ड से जुड़ी समस्याओं का परीक्षण किया जाएगा और जल्द से जल्द इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय लोग अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और वे सात दिन की समय सीमा खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि प्रशासन इस एक सप्ताह के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, तो फरीदाबाद में एक बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है, जो प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
