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वाराणसी: अब साल भर होंगे भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन, हाईटेक रथशाला का खाका तैयार

Varanasi Jagannath Rathshala 3D photo released. भगवान जगन्नाथ के भक्तों को पवित्र रथ के दर्शन के लिए केवल वार्षिक रथयात्रा मेले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 621
वाराणसी: अब साल भर होंगे भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन, हाईटेक रथशाला का खाका तैयार
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काशी में भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब उन्हें पवित्र रथ के दर्शन करने के लिए केवल वार्षिक रथयात्रा मेले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट ने एक अत्याधुनिक हाईटेक रथशाला के निर्माण की योजना बनाई है, जिससे श्रद्धालु साल के बारह महीने भगवान के रथ के दर्शन कर सकेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की 3D तस्वीरें भी जारी कर दी गई हैं, जो मंदिर के भव्य स्वरूप को दर्शाती हैं।

रथ का संरक्षण और आधुनिक सुविधाएं

मंदिर ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी के अनुसार, 1966 में निर्मित सागौन की लकड़ी से बने 18 फीट ऊंचे रथ का जीर्णोद्धार कार्य शुरू कर दिया गया है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इस रथ की मरम्मत, रंग-रोगन और तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से रथ पर आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं और पुरानी विद्युत प्रणाली को बदलकर नई वायरिंग व लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, रथ के हनुमत ध्वज को भी बदला जा रहा है ताकि इसकी धार्मिक गरिमा बनी रहे।

पूर्व में रथ को नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थान पर रखा जाता था, जहां उचित रखरखाव के अभाव में नमी और बारिश के कारण इसे काफी नुकसान पहुंचा था। सड़क चौड़ीकरण के बाद मिली जगह पर भी छत जर्जर होने से रथ की स्थिति बदहाल हो गई थी। इन समस्याओं को देखते हुए ट्रस्ट ने अब एक ऐसी रथशाला बनाने का निर्णय लिया है जो न केवल रथ को सुरक्षित रखेगी, बल्कि उसे एक स्थायी धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

पारदर्शी कांच से होंगे दर्शन

नई रथशाला की सबसे बड़ी विशेषता इसका पारदर्शी कांच का गेट होगा। इस डिजाइन के माध्यम से श्रद्धालु बाहर से ही रथ के दर्शन कर सकेंगे, जिससे रथ की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और भक्तों को दर्शन में कोई बाधा नहीं आएगी। रथशाला की कुल ऊंचाई 44 फीट रखी गई है, जिसमें 20 फीट का मुख्य प्रवेश द्वार होगा। ट्रस्ट ने यहां नियमित पूजा-अर्चना के लिए एक पुजारी की नियुक्ति का भी निर्णय लिया है, जो प्रतिदिन रथ की सेवा और साफ-सफाई का ध्यान रखेंगे।

वर्तमान में रथ स्मार्ट सिटी कार्यालय के पास रखा गया है। आगामी 15 जुलाई की सुबह पांच बजे इसे रथयात्रा चौराहे स्थित मेला स्थल पर ले जाया जाएगा। उसी दिन शाम को अस्सी स्थित मंदिर से प्रभु की डोली यात्रा के आगमन के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रथ का पूजन संपन्न होगा। 16 जुलाई की भोर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ पर विराजमान किया जाएगा, जिसके बाद विशेष श्रृंगार के साथ श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का क्रम शुरू हो जाएगा।

धार्मिक आयोजन की तैयारी

तीन दिवसीय रथयात्रा मेला 18 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों के जुटने की संभावना है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नई रथशाला का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और जल्द ही यह काशी के धार्मिक पर्यटन में एक नया अध्याय जोड़ेगी। यह पहल न केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि भक्तों की आस्था को भी साल भर जीवंत रखने का माध्यम बनेगी।

भगवान जगन्नाथ के भक्त इस नई व्यवस्था को लेकर काफी उत्साहित हैं। रथशाला के निर्माण के बाद, काशी आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु किसी भी समय भगवान के रथ के दर्शन कर सकेंगे, जो पहले केवल साल में एक बार ही संभव हो पाता था। मंदिर ट्रस्ट ने इस कार्य को पूरी पारदर्शिता और धार्मिक नियमों के पालन के साथ पूरा करने का संकल्प लिया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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