25 की उम्र में ही युवाओं के घुटने और कमर दे रहे जवाब, गलत जीवनशैली बन रही है बड़ी वजह
Kanpur Orthopedic Symposium 2026 highlights youth joint pain from mobile, computer addiction, bad posture. जो घुटनों और जोड़ों का दर्द पहले सिर्फ बुजुर्गों की परेशानी माना जाता था, वह अब 25 से 45 साल के युवाओं को तेजी से अपना शिकार बना रहा है। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक निष्क्रियता के कारण युवा कम उम्र में ही कमर दर्द, गर्दन दर्द और गठिया (आर्थराइटिस) जैसी गंभीर समस्याओं की ओर बढ़ रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बदलती जीवनशैली और शारीरिक निष्क्रियता का दुष्प्रभाव
आज के दौर में जोड़ों और घुटनों का दर्द केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। कानपुर में आयोजित एक हालिया ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 25 से 45 वर्ष की आयु के युवा तेजी से कमर दर्द, गर्दन की समस्या और गठिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर झुककर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधियों में कमी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गलत पॉश्चर में लंबे समय तक बैठने से रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे स्लिप डिस्क के मामले बढ़ रहे हैं। युवाओं में बढ़ती यह समस्या न केवल उनके कार्य प्रदर्शन को प्रभावित कर रही है, बल्कि भविष्य में उनकी गतिशीलता के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
रोबोटिक तकनीक से इलाज में आई क्रांति
कार्यक्रम के दौरान घुटना रिप्लेसमेंट विशेषज्ञों ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में आई नई तकनीकों ने जटिल ऑर्थोपेडिक समस्याओं का समाधान आसान बना दिया है। 'रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट' और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के माध्यम से अब मरीजों का इलाज बिना अधिक दर्द और रक्तस्राव के संभव है। इन आधुनिक तकनीकों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीज सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम हो जाते हैं।
संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 6,000 से अधिक सफल रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इन तकनीकों के उपयोग से रिकवरी की गति काफी तेज हो गई है, जिससे मरीज बहुत कम समय में अपनी दिनचर्या में वापस लौट पा रहे हैं।
समय पर पहचान और बचाव ही एकमात्र उपाय
डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि जोड़ों के हल्के दर्द को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अक्सर युवा इसे मामूली थकान समझकर छोड़ देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर उपचार न केवल प्रभावी होता है, बल्कि जटिलताओं को भी कम करता है।
इलाज के बाद फिजियोथेरेपी और सही रिहैबिलिटेशन की भूमिका पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्जरी के बाद शरीर की पुरानी ताकत और लचीलापन वापस पाने के लिए फिजियोथेरेपी अनिवार्य है। इसके बिना पूर्ण स्वास्थ्य लाभ पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता
सिम्पोजियम में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि केवल चिकित्सा तकनीक ही काफी नहीं है। स्वस्थ रहने के लिए अपनी आदतों में सुधार करना सबसे महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम, बैठने के सही तरीके को अपनाना और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना ही इन बीमारियों से बचने का एकमात्र स्थायी समाधान है।
कार्यक्रम में दांतों की देखभाल के लिए आधुनिक कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री और डेंटल इम्प्लांटोलॉजी जैसी सेवाओं पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि सही जीवनशैली का पालन और समय-समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर युवा अपनी हड्डियों और जोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
