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जंगलों की रक्षा के लिए एकजुट हुआ कोरकू समाज, 13 जुलाई को खंडवा में होगा बड़ा प्रदर्शन

Khandwa Burhanpur tribal community rallies for forest department support.

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 695
जंगलों की रक्षा के लिए एकजुट हुआ कोरकू समाज, 13 जुलाई को खंडवा में होगा बड़ा प्रदर्शन
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मध्य प्रदेश के खंडवा और बुरहानपुर जिलों में रहने वाले कोरकू आदिवासी समाज ने वनों के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। समाज ने वन विभाग के समर्थन में उतरने का निर्णय लिया है और आगामी 13 जुलाई को खंडवा में एक विशाल आंदोलन करने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन में बुरहानपुर जिले से भी हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल होकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे।

क्या है पूरा मामला और क्यों भड़का समाज?

यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में खंडवा जिले की गुड़ी रेंज के आमा खुजरी जंगल में हुई एक हिंसक घटना के बाद शुरू हुआ। वन विभाग की एक टीम जब वहां अतिक्रमणकारियों को अवैध रूप से बोवनी करने से रोकने के लिए पहुंची थी, तब उन पर हमला कर दिया गया। इस हमले में वन विभाग के आठ कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना ने स्थानीय आदिवासियों को झकझोर कर रख दिया, जिसके बाद उन्होंने वन विभाग के साथ खड़े होने का फैसला किया।

हमले के अगले ही दिन वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आमा खुजरी क्षेत्र में एक बड़ा अभियान चलाया। इस दौरान करीब 200 एकड़ वन भूमि को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराया गया। भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए वन विभाग ने वहां खंतियां खोदने का काम भी किया है, ताकि जमीन को सुरक्षित रखा जा सके।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

आंदोलन की घोषणा से पहले, सीवल और घाघरला क्षेत्र के कोरकू समाज के प्रतिनिधियों और वन समिति के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार को एक ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को निरंतर जारी रखा जाए। समाज का मानना है कि बाहरी अतिक्रमणकारियों को वन भूमि पर कब्जा करने से रोकने के लिए सख्ती बेहद जरूरी है।

कोरकू समाज की प्रमुख मांगों में यह शामिल है कि आदिवासियों की जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को तुरंत हटाया जाए। इसके साथ ही, आमा खुजरी क्षेत्र में अभी भी मौजूद अतिक्रमण को पूरी तरह से साफ करने की मांग की गई है। समाज ने स्पष्ट किया है कि वे अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और वन विभाग द्वारा वन माफियाओं के खिलाफ की जा रही किसी भी सख्त कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करेंगे।

भविष्य की रणनीति और सुरक्षा

आदिवासी समुदाय ने वन विभाग से यह भी आग्रह किया है कि जंगलों में भविष्य में होने वाले किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को रोकने के लिए एक ठोस और स्थायी कार्ययोजना तैयार की जाए। कोरकू समाज का कहना है कि जंगल उनके जीवन का आधार हैं और इनकी रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है। वे नहीं चाहते कि बाहरी तत्व उनके प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करें।

13 जुलाई को होने वाला यह आंदोलन न केवल वन विभाग के मनोबल को बढ़ाने के लिए है, बल्कि यह एक संदेश भी है कि स्थानीय आदिवासी समाज अब वनों के विनाश को बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रशासन और वन विभाग अब इस आंदोलन की तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे और आदिवासियों की मांगों पर उचित विचार किया जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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