प्रयागराज में संपन्न हुई लोक गायन और कथक कार्यशाला, नई पीढ़ी ने दिखाई सांस्कृतिक विरासत की झलक
Prayagraj 10-day Lok Sangeet & Kathak Dance Workshop concludes. प्रयागराज में लोक संस्कृति विकास संस्थान द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित 10 दिवसीय लोक गायन एवं कथक नृत्य कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

दस दिवसीय प्रशिक्षण का हुआ भव्य समापन
प्रयागराज में लोक संस्कृति विकास संस्थान और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय लोक गायन एवं कथक नृत्य कार्यशाला का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के दयानंद सभागार में आयोजित इस समापन समारोह में प्रतिभागियों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। दस दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण शिविर में युवाओं ने लोक संगीत की बारीकियों और कथक नृत्य की जटिलताओं को सीखा।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था। लोक संस्कृति विकास संस्थान के चेयरमैन शरद कुमार मिश्र के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित किया गया। संगीत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंजना त्रिपाठी ने इस पूरी कार्यशाला के संयोजन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
मंच पर दिखी प्रतिभागियों की प्रतिभा
समापन समारोह के दौरान मंच पर प्रतिभागियों का आत्मविश्वास देखते ही बनता था। लोक गायन प्रशिक्षक मनोज कुमार और कथक नृत्य की प्रशिक्षिका प्रिया शांति के मार्गदर्शन में तैयार किए गए कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मात्र दस दिनों के अल्प समय में प्रतिभागियों द्वारा दी गई प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि सही दिशा और प्रशिक्षण मिलने पर युवा किसी भी कला में निपुणता हासिल कर सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने की। इस अवसर पर प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के तौर पर मोटिवेशनल स्पीकर ऋचा सिंह भी मौजूद थीं। इसके अतिरिक्त पूर्व आईएएस आर.एस. वर्मा, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा और प्रसिद्ध कवयित्री प्रीता बाजपेयी सहित शहर के कई गणमान्य नागरिक कार्यक्रम के साक्षी बने।
सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर
मुख्य अतिथि महापौर गणेश केसरवानी ने अपने संबोधन में कहा कि लोक संस्कृति ही किसी समाज की वास्तविक पहचान होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं न केवल कला को जीवित रखती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक भी करती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों के अनुशासन और उनके प्रदर्शन की मुक्त कंठ से सराहना की।
विशिष्ट अतिथि ऋचा सिंह ने कला को आत्मविश्वास का सबसे बड़ा जरिया बताया। उन्होंने कहा कि कला के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सकता है। वहीं, संस्थान के चेयरमैन शरद कुमार मिश्र ने इस बात पर जोर दिया कि लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके संस्थान का प्राथमिक लक्ष्य है।
आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने स्पष्ट किया कि उनका महाविद्यालय भविष्य में भी कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का समापन संयोजक डॉ. रंजना त्रिपाठी द्वारा सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।
यह आयोजन प्रयागराज के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। दस दिनों तक चले इस प्रशिक्षण ने न केवल प्रतिभागियों के कौशल को निखारा, बल्कि शहर में कला के प्रति एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण भी किया। आने वाले समय में इस प्रकार के और भी आयोजन किए जाने की संभावना है ताकि लोक कलाओं को संरक्षित किया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
