उदयपुर जिला परिषद चुनाव: भाजपा प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी, रिसॉर्ट में मनेगी दिवाली
उदयपुर जिला परिषद चुनाव में दो चरणों की वोटिंग पूरी होते ही सियासी पारा चढ़ गया है। अपना बोर्ड और जिला प्रमुख बनाने के लिए भाजपा ने अभी से अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उदयपुर में भाजपा ने शुरू की सियासी घेराबंदी
उदयपुर जिला परिषद चुनाव के परिणाम आने से पहले ही भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित करने के लिए बाड़ेबंदी का रास्ता अपना लिया है। चुनाव के शुरुआती दो चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद पार्टी ने कोई भी जोखिम न लेने का निर्णय लिया है। इसी रणनीति के तहत रविवार को 25 से अधिक प्रत्याशियों को राजसमंद के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया गया है।
पार्टी का मुख्य उद्देश्य जिला प्रमुख का पद हासिल करना है। हालांकि अभी तीसरे चरण का मतदान बाकी है, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने अभी से अपने खेमे को एकजुट करना शुरू कर दिया है। जिन प्रत्याशियों के वार्डों में मतदान हो चुका है, उन्हें तत्काल प्रभाव से रिसॉर्ट में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए थे।
26 दिनों तक रिसॉर्ट में रहेंगे प्रत्याशी
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, जिले के शेष 8 वार्डों में 3 नवंबर को मतदान होगा। इन वार्डों के प्रत्याशियों को भी मतदान के तुरंत बाद सीधे रिसॉर्ट भेज दिया जाएगा। 20 नवंबर को मतों की गणना होगी और उसके बाद 25 व 26 नवंबर को क्रमशः जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख का चुनाव संपन्न होगा। इस पूरी प्रक्रिया के चलते भाजपा के सभी 47 प्रत्याशियों को कुल 26 दिनों तक बाड़ेबंदी में रहना होगा, जिसके कारण इस बार उनकी दिवाली अपने घरों के बजाय रिसॉर्ट में ही बीतेगी।
पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि उप जिला प्रमुख के चुनाव के बाद ही प्रत्याशियों को अपने घर जाने की अनुमति दी जाएगी। इस दौरान रिसॉर्ट में रहने वाले प्रत्याशियों की निगरानी और उनकी गतिविधियों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की पैनी नजर रहेगी।
जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए पांच दावेदार
यदि भाजपा का बोर्ड बनता है, तो जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए पार्टी के भीतर ही पांच प्रमुख चेहरों के नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व विधायक दलीचंद डांगी, विधानसभा चुनाव लड़ चुके हिम्मत सिंह झाला, पूर्व प्रधान प्रतिभा नागदा और घनश्याम मेनारिया शामिल हैं। इन नामों को लेकर पार्टी के भीतर लॉबिंग तेज हो गई है।
इन दावेदारों के पीछे पार्टी के बड़े नेताओं का समर्थन भी एक बड़ा कारक है। चंद्रगुप्त सिंह चौहान और दलीचंद डांगी को गुलाबचंद कटारिया गुट का माना जा रहा है, जबकि प्रतिभा नागदा और घनश्याम मेनारिया को उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा का करीबी बताया जा रहा है। हिम्मत सिंह झाला को पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी का समर्थन प्राप्त होने की चर्चा है।
गुटबाजी और प्रतिष्ठा का सवाल
जिला प्रमुख की दौड़ केवल प्रत्याशियों की जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गई है। विभिन्न गुटों के बीच चल रही इस खींचतान का असर 20 नवंबर के बाद देखने को मिलेगा, जब जीत हासिल करने वाले प्रत्याशियों की संख्या के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल, रिसॉर्ट में प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए पार्टी के जिला पदाधिकारी लगातार संपर्क में हैं। कुछ प्रत्याशियों ने निजी कारणों से सोमवार तक रिसॉर्ट पहुंचने की बात कही है, लेकिन पार्टी की कोशिश है कि सभी 47 प्रत्याशियों को एक साथ रखा जाए ताकि किसी भी प्रकार की सेंधमारी की संभावना को खत्म किया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!