इंदौर: कैलाश विजयवर्गीय के कार्यक्रम में पोस्टर लेकर पहुंचे प्रहलाद पांडेय कौन हैं? जानिए उनका विवादित सफर
भाजपा की लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ पदयात्रा में इंदौर के प्रहलाद पांडेय एक पोस्टर लेकर पहुंचे। इस पर लिखा था- 30 हजार रुपए का बल्ब, 33 हजार रुपए लीटर फिनाइल… जवाब दो।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

कैलाश विजयवर्गीय के कार्यक्रम में पोस्टर लेकर पहुंचे प्रहलाद पांडेय
इंदौर में हाल ही में आयोजित भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। इस कार्यक्रम में प्रहलाद पांडेय नाम के एक व्यक्ति ने पोस्टर लहराकर विरोध दर्ज कराया। पोस्टर पर '30 हजार रुपए का बल्ब और 33 हजार रुपए लीटर फिनाइल' जैसे सवाल लिखे थे, जिसने वहां मौजूद नेताओं और प्रशासन का ध्यान खींचा। इस घटना के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नाराजगी जताई और पुलिस ने प्रहलाद को हिरासत में ले लिया।
कौन हैं प्रहलाद पांडेय और क्या है उनका पेशा?
पेशे से प्रहलाद पांडेय एक मोटिवेशनल स्पीकर, बिहेवियरल ट्रेनर और लीडरशिप कोच हैं। वे विभिन्न निजी कंपनियों में मैनेजमेंट और लीडरशिप से जुड़ी ट्रेनिंग देकर अपनी आजीविका चलाते हैं। हालांकि, सार्वजनिक जीवन में वे खुद को एक जागरूक नागरिक मानते हैं। प्रहलाद का कहना है कि सरकार से सवाल पूछना उनका 'जन धर्म' है और वे लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी पत्नी संगीता भी उनके हर आंदोलन में सक्रिय रूप से साथ रहती हैं।
संगीता का मानना है कि यदि वे एक कामकाजी महिला से काम के बदले सवाल कर सकती हैं, तो सरकार से जवाब मांगने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यह लड़ाई केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था के लिए है।
16 साल पुरानी घटना से शुरू हुआ विरोध का सिलसिला
प्रहलाद पांडेय के विरोध करने के तरीके के पीछे 16 साल पुरानी एक घटना है। वे बताते हैं कि ट्रेन यात्रा के दौरान एक गर्भवती पत्नी के साथ सफर करते समय उन्होंने एक महिला के साथ हो रही बदसलूकी का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पिटाई का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद उन्होंने 36 घंटे तक पुलिस थाने में एफआईआर के लिए संघर्ष किया। इस अनुभव ने उन्हें व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।
तब से लेकर अब तक प्रहलाद का विरोध का तरीका एक जैसा रहा है। वे अक्सर व्यस्त चौराहों, नेताओं के घरों या बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहुंचकर तीखे सवाल पूछते हैं। इससे पहले वे नीट परीक्षा घोटाले को लेकर कैलाश विजयवर्गीय के बंगले के बाहर और अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ भी प्रदर्शन कर चुके हैं।
विवादों और पुलिस कार्रवाई का लंबा इतिहास
प्रहलाद पांडेय का नाम कई बार विवादों में रहा है। सितंबर 2026 में विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों के साथ हुए विवाद में उन्होंने पिटाई का आरोप लगाया था, जबकि विधायक ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया था। इसके अलावा, अवैध होर्डिंग्स हटाने की मांग को लेकर वे रीगल चौराहे पर 9 दिन तक भूख हड़ताल पर भी बैठ चुके हैं।
उनके विरोध का दायरा इंदौर से बाहर दिल्ली तक भी फैला है। वे 2012 के अन्ना आंदोलन के दौरान कोयला घोटाले के खिलाफ भी सक्रिय रहे थे और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर वे दिल्ली भी गए थे, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में लिया गया था।
प्रहलाद का दावा है कि वे किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं और न ही उनका किसी पार्टी से सीधा संबंध है। हालांकि, उनके विरोध के तरीकों को लेकर इंदौर के राजनीतिक गलियारों में हमेशा चर्चा बनी रहती है। पुलिस की कार्रवाई और नेताओं की नाराजगी के बावजूद, प्रहलाद का कहना है कि वे जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाना जारी रखेंगे।

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मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!