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मध्य प्रदेश में सफाई और जलापूर्ति पर संकट: 13 हजार कर्मचारी हड़ताल पर, सीएम से बातचीत की मांग

वेतन 10,500 से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने, अनुकंपा नियुक्ति समेत 4 मांगों को लेकर मध्य प्रदेश के सफाईकर्मी दो दिन से हड़ताल पर है। हड़ताल के चलते प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था बिगड़ गई है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

6 नवंबर 20263 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश में सफाई और जलापूर्ति पर संकट: 13 हजार कर्मचारी हड़ताल पर, सीएम से बातचीत की मांग
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भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में ठप हुई व्यवस्था

मध्य प्रदेश में नगर निगम के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। वेतन वृद्धि, अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसी चार प्रमुख मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से सफाईकर्मी सड़कों पर हैं। भोपाल में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 7 हजार सफाईकर्मियों के साथ-साथ 6 हजार अन्य विभागों के कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हो गए। इससे नगर निगम के सभी 85 वार्डों और 21 जोनों का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है।

हड़ताल का सबसे बुरा असर कचरा प्रबंधन पर पड़ा है। राजधानी भोपाल में कचरा उठाने वाली 400 से अधिक गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं। सामान्य दिनों में शहर से रोजाना करीब 850 टन कचरा आदमपुर छावनी भेजा जाता है, लेकिन अब कचरा सड़कों, बाजारों और गलियों में जमा हो रहा है। कई स्थानों पर डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़कों पर फैल गया है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जलापूर्ति बाधित होने की चेतावनी से बढ़ी चिंता

कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने स्पष्ट किया है कि अब यह लड़ाई आर-पार की है। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी सीधी बातचीत नहीं होती, तब तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कर्मचारियों ने अब जलापूर्ति ठप करने की चेतावनी दी है। यदि शुक्रवार से पानी की सप्लाई रोकी जाती है, तो भोपाल के 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन प्रभावित होंगे, जिससे शहर में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन में भी कामकाज पूरी तरह बंद है। गुरुवार को प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने मुख्यालय की बिजली आपूर्ति काट दी और मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के भी इस आंदोलन में शामिल होने से प्रशासनिक कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। भोपाल के अलावा शिवपुरी और विदिशा सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी सफाई व्यवस्था चरमरा गई है, जहां एक लाख से अधिक कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने संभाली कमान

सफाई व्यवस्था के बिगड़ने के बीच कुछ स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने खुद मोर्चा संभाला है। विदिशा जिले के सिरोंज में विधायक उमाकांत शर्मा ने स्वयं सड़क पर उतरकर झाड़ू लगाई और सफाई कार्य में सहयोग दिया। इसी तरह, राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में एक स्थानीय दुकानदार दिनेश कुमार नामदेव ने अपनी दुकान बंद कर बाजार की सफाई की। उनकी इस पहल को देखकर कुछ अन्य नागरिक भी मदद के लिए आगे आए, ताकि त्योहार के समय बाजार में गंदगी न फैले।

फिलहाल, कचरा कलेक्शन न होने के कारण कई स्थानों पर लोग कचरा जलाने को मजबूर हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। प्रशासन के लिए अब यह चुनौती है कि वह कैसे कर्मचारियों को बातचीत की मेज पर लाए और शहर की आवश्यक सेवाओं को बहाल करे। हड़ताल के अगले चरण में क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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