मध्य प्रदेश में सफाईकर्मियों की हड़ताल: दीपावली से पहले कचरा उठाव ठप, सरकार से आर-पार की लड़ाई
वेतन बढ़ाने, स्थायी करने समेत अन्य मांगों को लेकर बुधवार को पूरे मध्य प्रदेश के सफाईकर्मी हड़ताल पर रहेंगे। भोपाल में वे धरना प्रदर्शन करेंगे।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

दीपावली से पहले सफाई व्यवस्था चरमराई
मध्य प्रदेश में दीपावली के त्योहार से ठीक पहले सफाईकर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। बुधवार सुबह से ही भोपाल समेत राज्य के कई शहरों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। राजधानी भोपाल में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियां सड़कों पर नहीं उतरीं और उन्हें कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर ही खड़ा कर दिया गया है।
शहर के प्रमुख बाजारों, जैसे न्यू मार्केट और अन्य आवासीय इलाकों में कचरे के ढेर जमा होने लगे हैं। सफाईकर्मियों के काम बंद करने से शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। यूनियन का दावा है कि राज्य के 16 नगरीय निकायों और 374 नगर परिषदों के करीब एक लाख से अधिक कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं, जिससे हर रोज निकलने वाले करीब 850 टन कचरे का निस्तारण प्रभावित हो गया है।
प्रमुख मांगें और सरकार के साथ बातचीत
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने स्पष्ट किया है कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती। सफाईकर्मियों की मुख्य मांगों में उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, ठेका प्रथा को समाप्त कर सभी को स्थायी करना, न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपये निर्धारित करना और परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान शामिल है।
यूनियन के पदाधिकारियों की बुधवार को राज्य के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रमुख सचिव मनोज दुबे के साथ बैठक प्रस्तावित है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बातचीत में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता है, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और दीपावली के दौरान भी सफाई कार्य बंद रखेंगे।
सड़कों पर विरोध और प्रशासन का रुख
हड़ताल से पहले मंगलवार को भी सफाईकर्मियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। भोपाल के जहांगीराबाद चौराहे पर बड़ी संख्या में जुटे कर्मचारियों ने जाम लगा दिया था। उनका आरोप था कि वे अपनी मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपना चाहते थे, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा। इससे आक्रोशित कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने की कोशिश की, जिन्हें पुलिस ने बेरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था।
प्रशासन के साथ लंबी जद्दोजहद के बाद कर्मचारी शाहजहांनी पार्क में धरने पर बैठ गए थे। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से केवल आश्वासन ही मिले हैं, कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। इसी कारण अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
शहर की सफाई व्यवस्था पर संकट
भोपाल में कचरा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। शहर में 400 से अधिक वाहन डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन में लगे हैं, जो प्रतिदिन 17 गार्बेज स्टेशनों तक कचरा पहुंचाते हैं। वहां से कैप्सूल टैंकरों के जरिए कचरा आदमपुर छावनी भेजा जाता है। हड़ताल के कारण यह पूरी चेन टूट गई है, जिससे आने वाले दिनों में शहर में गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
फिलहाल, आम जनता और प्रशासन की नजरें सरकार और सफाई कर्मचारी यूनियन के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। यदि वार्ता विफल रहती है, तो दीपावली के त्योहार के दौरान शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर संकट और गहरा सकता है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!