सुपौल: राज्यकर्मी का दर्जा पाने के लिए सड़कों पर उतरे डाटा एंट्री ऑपरेटर, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी
सुपौल जिला मुख्यालय में रविवार को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने रोड मार्च निकाला। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर हुए इस मार्च में डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी बॉयज एंड गर्ल्स शामिल हुए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार के सुपौल जिला मुख्यालय में रविवार को डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने अपनी मांगों को लेकर एक विशाल रोड मार्च निकाला। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ऑपरेटरों, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी कर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान करने की है।
गांधी मैदान से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
यह मार्च जिला अध्यक्ष गुंजन कुमार और सचिव अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में गांधी मैदान से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ गुजरा। प्रदर्शन के दौरान कर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा को समाप्त करने की अपील की। इस दौरान बड़ी संख्या में आईटी बॉयज एंड गर्ल्स भी मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी कार्यक्षमता और अनुभव को देखते हुए स्थायीकरण की मांग उठाई।
प्रदर्शन के समापन पर संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत इन कर्मियों को अब और अधिक समय तक अस्थायी मानकर नहीं रखा जाना चाहिए।
25 वर्षों से दे रहे हैं सेवाएं
जिला अध्यक्ष गुंजन कुमार ने जानकारी दी कि बेल्ट्रॉन के माध्यम से करीब 20 हजार डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य तकनीकी कर्मी पिछले 25 वर्षों से सरकारी कार्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मी विभागों में टंकण, लिपिकीय कार्य और आईटी से जुड़ी ऑनलाइन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे हैं। इसके बावजूद, उन्हें आज भी राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिल सका है।
उन्होंने आगे कहा कि इन कर्मियों की दक्षता परीक्षा पहले ही ली जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, बिपार्ड के माध्यम से उन्हें आवासीय संस्थागत प्रशिक्षण भी दिया गया है और प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए हैं। जब कर्मी सभी आवश्यक अर्हताएं पूरी कर चुके हैं, तो उन्हें स्थायी दर्जा न देना उनके साथ अन्याय है।
वित्तीय बोझ का तर्क और भविष्य की रणनीति
संयुक्त मोर्चा का तर्क है कि सरकार वर्तमान में कर्मियों के पारिश्रमिक के अलावा सेवा शुल्क और जीएसटी के रूप में बड़ी राशि खर्च कर रही है। यदि इन कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा दे दिया जाता है, तो सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह केवल उनके अधिकारों की लड़ाई है।
चेतावनी देते हुए मोर्चा ने कहा कि यदि उनकी मांगें समय रहते पूरी नहीं की गईं, तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। इसमें महाधरना, काला बिल्ला लगाकर विरोध और अंततः हड़ताल जैसे कदम शामिल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आंदोलन के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
इस प्रदर्शन के दौरान मीडिया प्रभारी चंदन कुमार सिंह, माधव कुमार, ओबेश आलम, घनश्याम कुमार, सोनू कुमार, शुभम कुमार, शशि कुमार और अमरेंद्र कुमार सहित कई अन्य कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में अपनी मांगों को पूरा करने की मांग दोहराई।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!