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भोपाल में स्वदेशी मेले का भव्य समापन: 12 दिनों तक स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की रही धूम

भोपाल के एमवीएम ग्राउंड में 12 दिन चले स्वदेशी मेले का समापन हो गया है। बुधवार रात को राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मेले में पहुंचे।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

5 नवंबर 20263 मिनट पढ़ें
भोपाल में स्वदेशी मेले का भव्य समापन: 12 दिनों तक स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की रही धूम
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भोपाल के एमवीएम ग्राउंड में पिछले 12 दिनों से चल रहे स्वदेशी मेले का बुधवार रात को विधिवत समापन हो गया। इस आयोजन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विशेष रूप से शिरकत की। मेले का मुख्य उद्देश्य देश के स्वदेशी उत्पादों, हस्तशिल्प, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और स्थानीय स्टार्टअप्स को एक बड़ा मंच प्रदान करना था। आयोजन के दौरान 200 से अधिक स्टॉल्स पर देशभर के कारीगरों और बुनकरों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया।

स्वरोजगार और उद्यमिता को मिला बढ़ावा

स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस मेले ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम किया। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के प्रति प्रोत्साहित किया गया है। मेले में न केवल बिक्री हुई, बल्कि नए उद्यमियों को अपने व्यापार को विस्तार देने का अवसर भी मिला।

सांसद आलोक शर्मा ने मेले के समापन अवसर पर कहा कि भोपाल की समृद्ध संस्कृति के अनुरूप यह आयोजन अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में इस तरह के मेलों का विस्तार मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भोपाल में रानी कमलापति की स्मृति में भी विशेष मेलों का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि शहर की विरासत को नई पहचान मिल सके।

स्वदेशी के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू पर जोर

भाजपा मध्य प्रदेश के मोर्चा प्रभारी मनोरंजन मिश्रा ने स्वदेशी के वैचारिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे केवल आर्थिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र की प्रगति के लिए स्व-भाव को जागृत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 1991 के वैश्वीकरण के दौर में भी स्वदेशी का विचार एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरा था, जो आज के समय में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज खेती के लिए बीज और खाद जैसे जरूरी संसाधनों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता है। उन्होंने आह्वान किया कि स्वदेशी को केवल वस्तुओं तक सीमित न रखकर इसे अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाना होगा, तभी गांव और किसान वास्तव में सशक्त हो पाएंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही रौनक

मेले के दौरान प्रतिदिन रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें लोक नृत्य, गायन और वादन ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों ने मेले के माहौल को और भी जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के समापन के दौरान स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

स्वावलंबन भारत फाउंडेशन के सीईओ संकेत सिंह राठौड़ ने कहा कि आजादी के बाद शुरू हुई आर्थिक लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया अब वैश्वीकरण से स्थानीयकरण की ओर लौट रही है, जिसमें स्वदेशी का विचार एक नई क्रांति की तरह काम कर रहा है। यह मेला इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास साबित हुआ है।

मेले के समापन समारोह में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, सुधीर दाते, संजीव शर्मा, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज और दीपक वर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक और पदाधिकारी मौजूद थे। 12 दिनों तक चले इस आयोजन ने भोपाल के निवासियों को स्वदेशी उत्पादों से जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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