रोहतक में किसानों का हल्ला बोल: एमएसपी के दावों पर भाजपा को घेरा, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
रोहतक में भारतीय किसान यूनियन (नैन) की राज्य स्तरीय मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों ने भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर रोष प्रकट किया। किसानों ने सरकार के खिलाफ राष्ट्र स्तर पर आगामी आंदोलन की घोषणा भी की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

रोहतक में भारतीय किसान यूनियन (नैन) की राज्य स्तरीय बैठक
रोहतक की अनाज मंडी में भारतीय किसान यूनियन (नैन) की एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस दौरान किसानों ने भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी नाराजगी जाहिर की। बैठक में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोगेंद्र नैन ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए आगामी समय में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने का ऐलान किया।
एमएसपी के दावों पर भाजपा को चुनौती
जोगेंद्र नैन ने भाजपा की प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के एमएसपी संबंधी बयानों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनौती दी कि भाजपा नेता उन 24 फसलों के नाम गिनाएं जिन पर एमएसपी देने का दावा किया जा रहा है। नैन ने कहा कि सरकार उन फसलों का जिक्र कर रही है जो हरियाणा में पैदा ही नहीं होतीं, जैसे जूट, नारियल और रबड़। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के मुख्य फसलों जैसे धान, कपास, गन्ना और गेहूं पर किसानों को उचित एमएसपी नहीं मिल पा रहा है।
नैन ने मुख्यमंत्री नायब सैनी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पंजाब में जाकर राज्य को खुशहाल बनाने की बात करते हैं, जबकि हरियाणा के किसान खुद बदहाली का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले सरकार को अपने राज्य के किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
पानी की किल्लत और सरकार की नीतियां
बैठक में पानी की समस्या को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। जोगेंद्र नैन ने आरोप लगाया कि केंद्र के दबाव में आकर हरियाणा का पानी राजस्थान को दिया जा रहा है, जिसका किसान कड़ा विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा, नहरों को पक्का करने की प्रक्रिया के कारण हैंडपंप सूख गए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है।
किसानों ने चैनत गांव के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और ग्रामीणों के साथ किए गए धोखे का आरोप लगाया। उन्होंने मंत्री श्रुति चौधरी से सवाल किया कि भाखड़ा का पानी यमुना क्षेत्र में क्यों भेजा जा रहा है।
आगामी आंदोलन की रणनीति
अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में किसान संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है। जोगेंद्र नैन ने घोषणा की कि 22 से 24 जुलाई तक प्रदेश के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 28-29 जुलाई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में प्रदर्शन किया जाएगा।
विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में 10 अगस्त को 'जेल भरो' आंदोलन का निर्णय लिया गया है। किसानों का कहना है कि सरकार फसल भुगतान में देरी और खरीद के जटिल नियमों के जरिए उन्हें परेशान कर रही है। सरकार के 24 घंटे में भुगतान के दावों को खारिज करते हुए किसानों ने कहा कि उन्हें अपनी फसल के पैसों के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है।
बैठक में जिला प्रधान रणधीर सिंह सहित कई किसान नेता मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!