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रेवाड़ी: भिवाड़ी का दूषित पानी चार फीट ऊंचे रैंप को पार कर धारूहेड़ा में घुसा

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

9 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 732
रेवाड़ी: भिवाड़ी का दूषित पानी चार फीट ऊंचे रैंप को पार कर धारूहेड़ा में घुसा
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धारूहेड़ा में फिर गहराया जलभराव का संकट

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा क्षेत्र में भिवाड़ी से आने वाले दूषित पानी की समस्या एक बार फिर विकराल हो गई है। बुधवार को हुई तेज बारिश के बाद भिवाड़ी की ओर से भारी मात्रा में प्रदूषित पानी धारूहेड़ा की सीमा में प्रवेश कर गया। स्थिति इतनी गंभीर थी कि पानी ने प्रशासन द्वारा बनाए गए चार फीट ऊंचे रैंप को भी पार कर लिया, जिससे स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

बारिश के दबाव और पानी के तेज बहाव के कारण सुरक्षा के लिए बनाया गया यह रैंप भी क्षतिग्रस्त हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला जहरीला और दूषित पानी जानबूझकर बरसात के मौसम में धारूहेड़ा की ओर छोड़ दिया जाता है, जो सड़कों पर जमा होकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और आवागमन में बाधा का कारण बनता है।

क्या था रैंप के पीछे का उद्देश्य?

इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने धारूहेड़ा का दौरा किया था। उनके निर्देश पर प्रशासन ने अलवर बाईपास पर धारूहेड़ा की सीमा पर चार फीट ऊंचा रैंप तैयार किया था। इस रैंप का मुख्य उद्देश्य भिवाड़ी से आने वाले पानी को धारूहेड़ा में घुसने से रोकना था। इसके निर्माण के बाद कुछ समय के लिए स्थिति में सुधार भी देखा गया था।

हालांकि, भिवाड़ी के स्थानीय लोग इस रैंप का विरोध करते रहे हैं। उनका तर्क है कि यह प्राकृतिक जल बहाव में बाधा उत्पन्न करता है। इसे लेकर भिवाड़ी के निवासियों द्वारा रैंप को हटाने की मांग की जाती रही है और कई बार इसे तोड़ने की धमकियां भी दी गई हैं। वर्तमान में यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

हाई कोर्ट में चल रही है कानूनी प्रक्रिया

रैंप को हटाने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक लोकल कमिश्नर की नियुक्ति की थी, जिन्होंने मौके का मुआयना कर स्थानीय लोगों से फीडबैक लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त महीने में निर्धारित है। धारूहेड़ा और भिवाड़ी के बीच पानी का यह विवाद लगभग एक दशक पुराना है, जिसका कोई स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।

हरियाणा और राजस्थान सरकारें इस विवाद को सुलझाने का दावा कर रही हैं। प्रस्तावित समाधान के तहत भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र के पानी को एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिए शोधित करने की योजना है, जिसके लिए पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त, बरसाती पानी को सब बैराज में एकत्रित कर पाइपलाइन के जरिए ड्रेन-8 तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

स्थायी समाधान की प्रतीक्षा

प्रशासन ने ड्रेन-8 तक पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में जलभराव की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, जब तक यह परियोजना पूरी नहीं हो जाती, तब तक धारूहेड़ा के निवासियों को हर बारिश के मौसम में दूषित पानी के जलभराव का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा करने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें इस दशक पुरानी समस्या से मुक्ति मिल सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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