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मध्यप्रदेश में पटवारियों का अल्टीमेटम: सात दिन में मांगें नहीं मानीं तो 15 जुलाई से करेंगे काम बंद

Harda, MP Patwari strike warning: 3-day protest July 2026. 5 demands. हरदा में मध्यप्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के पटवारियों ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण की मांग की। संघ ने चेतावनी दी कि यदि सात दिन के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 15 से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर के पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 675
मध्यप्रदेश में पटवारियों का अल्टीमेटम: सात दिन में मांगें नहीं मानीं तो 15 जुलाई से करेंगे काम बंद
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मध्यप्रदेश में पटवारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्यभर के पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे 15 जुलाई से तीन दिवसीय सांकेतिक अवकाश पर चले जाएंगे।

सरकार से आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ समाधान

हरदा जिला पटवारी संघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष विकास जोशी ने बताया कि संगठन लंबे समय से अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर शासन के संपर्क में है। उन्होंने आरोप लगाया कि नवंबर 2025 में आयोजित पटवारी महाधिवेशन के दौरान मुख्यमंत्री ने मांगों के निराकरण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक न तो महाधिवेशन की तारीख तय हुई और न ही मांगों पर कोई सकारात्मक पहल की गई है। इस उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण प्रदेशभर के पटवारियों में भारी आक्रोश है।

संघ ने स्पष्ट किया है कि 15 से 17 जुलाई तक प्रस्तावित तीन दिवसीय सांकेतिक अवकाश केवल एक शुरुआत है। यदि इसके बाद भी सरकार ने उनकी समस्याओं को अनसुना किया, तो प्रदेश स्तर पर चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।

पटवारियों की पांच प्रमुख मांगें

पटवारी संघ ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रखा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कैडर रिव्यू लागू कर पदोन्नति और समयमान वेतनमान का लाभ देना है। संघ का तर्क है कि अन्य विभागों में पदोन्नतियां हो रही हैं, जबकि पटवारी संवर्ग लंबे समय से इस लाभ से वंचित है। इसके अलावा, 2018 के बाद से नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा आयोजित न होने से भी योग्य पटवारियों के करियर पर बुरा असर पड़ रहा है।

संघ ने राजस्व न्यायालयीन मामलों में काम करने वाले पटवारियों के लिए 'जज प्रोटेक्शन एक्ट' के समान सुरक्षा की मांग की है ताकि उन्हें अनावश्यक कानूनी मुकदमों और एफआईआर से बचाया जा सके। साथ ही, स्वामित्व योजना, कृषि संगणना और फार्मर आईडी शिविर जैसे कार्यों का वर्षों से लंबित भुगतान तुरंत करने की मांग की गई है। भुगतान न होने की स्थिति में भविष्य के सभी सरकारी कार्यों के बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई है।

अंतिम मांग के रूप में, संघ ने कर्मचारी हितों की आवाज उठाने वाले पदाधिकारियों के स्थानांतरण को निरस्त करने और नियमित रूप से परामर्शदात्री समिति की बैठकें आयोजित करने का आग्रह किया है।

प्रदेशभर में एकजुटता का प्रदर्शन

प्रदेश संवाद समिति के अध्यक्ष राजीव जैन ने कहा कि शासन का रवैया पटवारी संवर्ग के प्रति भेदभावपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पटवारी राजस्व विभाग की रीढ़ हैं और उनके साथ हो रही अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हरदा में ज्ञापन सौंपने के दौरान अनुराग कारोलिया, सुनील शर्मा, शिवनारायण बघेल, संतोष गौर और फूलसिंह उईके सहित बड़ी संख्या में पटवारी उपस्थित रहे।

अब गेंद सरकार के पाले में है। सात दिन का यह अल्टीमेटम समाप्त होने के बाद प्रदेश की राजस्व व्यवस्था पर असर पड़ना तय है। यदि सरकार समय रहते वार्ता के लिए आगे नहीं आती है, तो 15 जुलाई से होने वाला सांकेतिक अवकाश राज्य के प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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