रेवाड़ी महिला गार्ड मामला: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने डीसी और एसपी को भेजा नोटिस, 15 दिन में मांगा जवाब
Rewari DC SP NCSC notice woman guard case. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने डीसी और एसपी को नोटिस जारी किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

रेवाड़ी अस्पताल में महिला गार्ड के साथ अभद्रता का मामला
हरियाणा के रेवाड़ी जिले में एक महिला सुरक्षा गार्ड के साथ हुई कथित अभद्रता और जातिसूचक टिप्पणी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए रेवाड़ी के उपायुक्त (DC) अभिषेक मीणा और पुलिस अधीक्षक (SP) हेमेंद्र कुमार मीणा को आधिकारिक नोटिस जारी किया है। आयोग ने जिला प्रशासन से इस पूरे प्रकरण पर 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।
आयोग की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होना पड़ सकता है। यह मामला 23 मई 2026 का बताया जा रहा है, जब जिला अस्पताल में तैनात महिला सुरक्षा गार्ड ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए एक डॉक्टर के रिश्तेदार को महिला वार्ड में जाने से रोका था।
क्या है पूरा घटनाक्रम और आरोप
पीड़ित महिला गार्ड के अनुसार, जब उसने अस्पताल के नियमों का हवाला देते हुए डॉक्टर के साथ आए व्यक्ति को अंदर जाने से मना किया, तो डॉक्टर ने कथित तौर पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। महिला ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि इस दौरान उसके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। महिला का कहना है कि उसने इस घटना की शिकायत स्थानीय स्तर पर की थी, लेकिन उचित कार्रवाई न होने के कारण उसे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है, जिसमें एक अन्य कर्मचारी ने भी अस्पताल प्रबंधन पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। महिला गार्ड के पक्ष में गवाही देने वाले एक पुरुष वार्ड अटेंडेंट ने दावा किया है कि गवाही देने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उसे नौकरी से हटाने का नोटिस थमा दिया। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
महिला गार्ड की शिकायत में जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन द्वारा मामले को दबाने के प्रयास का भी जिक्र है। आयोग ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लिया है। अब डीसी और एसपी को यह स्पष्ट करना होगा कि मामले की सूचना मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई है और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। आयोग की सख्ती के बाद जिला प्रशासन के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के प्रति होने वाले इस तरह के व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही या दुर्व्यवहार की पुष्टि होती है, तो संबंधितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
आगामी 15 दिनों के भीतर डीसी और एसपी को आयोग को यह बताना होगा कि मामले में एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं, और यदि की गई है, तो जांच किस स्तर पर है। इसके अलावा, गवाह को हटाने के मामले में भी आयोग ने स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला अब एक कानूनी मोड़ पर है, जहां प्रशासन को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।
रेवाड़ी के इस मामले ने न केवल अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान से जुड़े गंभीर मुद्दों को भी उजागर किया है। आयोग की इस कार्रवाई से पीड़ित महिला को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस नोटिस का क्या जवाब देता है और आगे क्या कार्रवाई अमल में लाई जाती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
