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पिंजौर थाने में भाजपा पार्षद और एसएचओ के बीच तीखी बहस, रेहड़ी हटाने को लेकर मचा बवाल

Panchkula BJP leader & SHO heated argument at police station. भाजपा नेता बोले- आपके पैदा होने से पहले रेहड़ियां लग रही; पिंजौर SHO-कब्जा करके बैठोगे, कार्रवाई करूंगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

9 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 797
पिंजौर थाने में भाजपा पार्षद और एसएचओ के बीच तीखी बहस, रेहड़ी हटाने को लेकर मचा बवाल
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पिंजौर थाने में पुलिस और जनप्रतिनिधि आमने-सामने

हरियाणा के पंचकूला जिले के पिंजौर थाने में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब भाजपा पार्षद सौरभ गुप्ता और थाना प्रभारी (SHO) राजेश कुमार के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। यह विवाद थाने के बाहर रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदारों को हटाए जाने के बाद शुरू हुआ। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच करीब चार मिनट तक तीखी बहस होती नजर आ रही है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब एसएचओ राजेश कुमार ने थाने के बाहर अतिक्रमण कर रही रेहड़ियों को वहां से हटवा दिया। इसके बाद पार्षद सौरभ गुप्ता प्रभावित दुकानदारों के साथ थाने पहुंचे और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पार्षद का तर्क था कि जब तक इन दुकानदारों के लिए नगर निगम द्वारा कोई वैकल्पिक स्थान निर्धारित नहीं किया जाता, तब तक उन्हें वहां से नहीं हटाया जाना चाहिए।

बहस के दौरान लगे गंभीर आरोप

वीडियो में पार्षद सौरभ गुप्ता को कोर्ट के आदेश की कॉपी दिखाते हुए देखा जा सकता है, जिस पर एसएचओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह थाने की सुरक्षा का मामला है और वे किसी भी हाल में यहां अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेंगे। पार्षद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रेहड़ी वालों के साथ बदसलूकी की और उन्हें थप्पड़ मारे। उन्होंने कहा कि वे एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता की बात रखने आए थे, लेकिन एसएचओ ने उनकी बात सुनने से ही इनकार कर दिया।

पार्षद ने एसएचओ से इस पूरी कार्रवाई को लिखित में देने की मांग की, जिसे पुलिस अधिकारी ने सिरे से खारिज कर दिया। एसएचओ ने स्पष्ट किया कि उन्हें थाने की सुरक्षा और व्यवस्था देखनी है, जिसके लिए गेट के पास जगह खाली होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बार-बार समझाने के बावजूद रेहड़ी वाले वहां से नहीं हट रहे थे, जिससे पुलिस की गाड़ियों की आवाजाही में भी दिक्कत आ रही थी।

पुलिस का पक्ष और सुरक्षा का हवाला

एसएचओ राजेश कुमार ने अपने बचाव में कहा कि थाने के बाहर रेहड़ियों के जमावड़े से मुख्य द्वार पूरी तरह घिर गया था। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने यहां कार्यभार संभाला है, तब से दुकानदारों को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन वे अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं थे। आपातकालीन स्थिति में पुलिस बल और गाड़ियों के लिए जगह न होने के कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।

थाने में हुए इस हंगामे के दौरान अन्य पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे। पार्षद ने चेतावनी दी है कि वे इस पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करेंगे। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का अतिक्रमण थाने के सुरक्षा प्रोटोकॉल के खिलाफ है।

आगे की स्थिति

फिलहाल, इस घटना के बाद पिंजौर इलाके में रेहड़ी-पटरी वालों के पुनर्वास और अतिक्रमण के मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ जनप्रतिनिधि जनता के हितों की दुहाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन सुरक्षा और सुगम यातायात का हवाला देकर अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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