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ललितपुर: फसल बर्बादी का मुआवजा न मिलने पर किसानों का फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट में किया प्रदर्शन

देवरान गांव के 50 से अधिक किसान सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक धरने पर बैठे रहे। वे चार महीने पहले मार्च में हुई अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों के मुआवजे की मांग कर रहे थे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
ललितपुर: फसल बर्बादी का मुआवजा न मिलने पर किसानों का फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट में किया प्रदर्शन
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उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में अपनी फसलों के नुकसान का मुआवजा न मिलने से परेशान किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। देवरान गांव के 50 से अधिक किसान अपनी मांगों को लेकर सुबह 11 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे और दोपहर 1 बजे तक धरने पर बैठे रहे। किसानों का आरोप है कि चार महीने पहले हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि ने उनकी मेहनत की कमाई को पूरी तरह नष्ट कर दिया था, लेकिन अब तक उन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है।

अधिकारियों की बेरुखी से बढ़ा आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान किसानों में उस समय भारी आक्रोश देखने को मिला जब दो घंटे बीत जाने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी उनका ज्ञापन लेने के लिए नहीं पहुंचा। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि वे अपनी समस्या लेकर कई बार चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं।

किसानों ने बताया कि मार्च 2026 में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया था। उस समय उप जिलाधिकारी को घटना की सूचना दी गई थी। बीमा कंपनी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर फसल क्षति का सर्वे भी किया था, जिसमें सभी काश्तकारों की फसल पूरी तरह नष्ट होना पाया गया था। इसके बावजूद, आज तक बीमा कंपनी की ओर से मुआवजे की राशि जारी नहीं की गई है।

बीमा कंपनी और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि सर्वे के बाद उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि जल्द ही उनके बैंक खातों में मुआवजे की राशि पहुंच जाएगी। लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी बीमा कंपनी और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। किसानों का आरोप है कि बीमा कंपनियां सर्वे के नाम पर खानापूर्ति करती हैं और बाद में भुगतान के समय टालमटोल करती हैं।

इस धरने में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों सहित किरत सिंह, राजेश कुमार, मनोज कुमार, लखन लाल और हरिराम जैसे कई किसान शामिल हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया, तो वे आमरण अनशन करने के लिए मजबूर होंगे।

आगे की राह और प्रशासन की चुप्पी

ललितपुर में किसानों का यह प्रदर्शन एक बार फिर कृषि क्षेत्र में बीमा दावों के निपटान की धीमी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। फसल नुकसान के कारण पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान अब प्रशासन के उदासीन रवैये से और अधिक हताश हैं। फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

आने वाले दिनों में यदि किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है। स्थानीय स्तर पर किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वे बीमा कंपनियों पर दबाव बनाएं ताकि प्रभावित किसानों को उनकी फसल का उचित मुआवजा समय पर मिल सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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