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राजस्थान के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड: विकास निधि खर्च करने में कई दिग्गज फिसड्डी, किसी ने नहीं खोला खाता

राजस्थान के ज्यादातर लोकसभा सासंद एमपीलैड फंड (सासंद विकास निधि) से रुपया खर्च करने में कंजूसी दिखा रहे हैं। सभी सासंदों को सड़क, स्कूल, अस्पताल और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने के लिए 3 बार 5-5 करोड़ रुपये का फंड मिल चुका है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
राजस्थान के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड: विकास निधि खर्च करने में कई दिग्गज फिसड्डी, किसी ने नहीं खोला खाता
मूल स्रोत

राजस्थान के लोकसभा सांसदों द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली 'सांसद निधि' (MPLADS) के उपयोग को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, प्रदेश के अधिकांश सांसद इस फंड को खर्च करने में भारी सुस्ती दिखा रहे हैं। जबकि प्रत्येक सांसद को अपने क्षेत्र में सड़क, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए हर साल 5 करोड़ रुपये का बजट मिलता है, कई जनप्रतिनिधियों ने अब तक जारी हुई करोड़ों की राशि का एक छोटा हिस्सा ही खर्च किया है।

फंड के उपयोग में कंजूसी और शून्य खर्च की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, 19 जून 2026 तक की स्थिति देखें तो टोंक-सवाई माधोपुर से कांग्रेस सांसद हरीश चंद्र मीना ने अब तक विकास कार्यों के लिए एक रुपये की भी अनुशंसा नहीं की है। उन्हें अब तक कुल 15 करोड़ रुपये का फंड आवंटित हुआ था, जिसमें से 14 करोड़ 70 लाख रुपये अभी भी बिना उपयोग के पड़े हैं। इसी तरह, केंद्रीय मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी फंड खर्च करने में बेहद कम रुचि दिखाई है। उन्होंने 14.70 करोड़ के आवंटन के मुकाबले अब तक केवल 74 लाख 40 हजार रुपये के कार्यों की ही सिफारिश की है।

अन्य कम खर्च करने वाले सांसदों में चित्तौड़गढ़ से भाजपा सांसद चंद्रप्रकाश जोशी और झालावाड़-बारां से दुष्यंत सिंह शामिल हैं। चंद्रप्रकाश जोशी ने 1.04 करोड़ और दुष्यंत सिंह ने 1.33 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की अनुशंसा की है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भी अपने क्षेत्र के विकास के लिए मिले बजट का उपयोग करने में काफी पीछे चल रहे हैं।

विकास कार्यों में आगे रहने वाले सांसद

दूसरी ओर, कुछ सांसदों ने इस फंड का सक्रियता से उपयोग किया है। भरतपुर से कांग्रेस सांसद संजना जाटव इस सूची में सबसे आगे हैं, जिन्होंने 11 करोड़ 92 लाख रुपये के विकास कार्यों की अनुशंसा की है। उनके बाद अलवर से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम आता है, जिन्होंने 10.50 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी 9.79 करोड़ रुपये और बीकानेर से केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने 8.79 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सिफारिश की है।

अन्य प्रमुख सांसदों में अजमेर से भागीरथ चौधरी (9.95 करोड़), चूरू से राहुल कस्वां (9.74 करोड़), और बांसवाड़ा से राजकुमार रोत (9.67 करोड़) ने भी संतोषजनक ढंग से फंड का उपयोग किया है। इन सांसदों का प्रदर्शन बताता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो सांसद निधि के माध्यम से जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

बजट की कमी और सांसदों का पक्ष

सांसदों का तर्क है कि 5 करोड़ का सालाना फंड एक बड़े लोकसभा क्षेत्र के लिए अपर्याप्त है। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के सांसद कुलदीप इंदौरा का कहना है कि उनके क्षेत्र में 8 विधानसभा सीटें आती हैं और उनके पास 100 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के प्रस्ताव लंबित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फंड खर्च करना सांसद का व्यक्तिगत अधिकार है और कई बार चुनाव के करीब आने पर कार्यों की गति बढ़ाई जाती है।

सांसदों का यह भी मानना है कि विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि का वितरण करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि प्राथमिकताओं का चयन करना पड़ता है। हालांकि, जनता के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि जब सरकार की ओर से विकास के लिए पैसा उपलब्ध है, तो उसे खर्च करने में देरी क्यों की जा रही है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या शेष सांसद अपने बचे हुए फंड का उपयोग समय रहते कर पाते हैं या फिर यह राशि बिना खर्च हुए ही वापस चली जाएगी। विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति बनाए रखना जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिस पर अब जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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