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पैदल चलने के लिए देश का सबसे मुफीद शहर बना लखनऊ, रिपोर्ट में मिली नंबर-1 रैंकिंग

लखनऊ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्टेट ऑफ इंडियन स्ट्रीट्स रिपोर्ट-2026 में देश के 12 बड़े शहरों के सर्वे में लखनऊ को सबसे ज्यादा पैदल चलने लायक (वॉकेबल) शहर माना गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
पैदल चलने के लिए देश का सबसे मुफीद शहर बना लखनऊ, रिपोर्ट में मिली नंबर-1 रैंकिंग
मूल स्रोत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने शहरी विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 'स्टेट ऑफ इंडियन स्ट्रीट्स रिपोर्ट-2026' के अनुसार, लखनऊ को भारत का सबसे अधिक पैदल चलने योग्य (वॉकेबल) शहर घोषित किया गया है। देश के 12 प्रमुख महानगरों के बीच किए गए इस विस्तृत सर्वे में लखनऊ ने शीर्ष स्थान प्राप्त कर अन्य बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है।

सर्वे में लखनऊ का प्रदर्शन और अन्य शहरों की स्थिति

रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ की लगभग 28 फीसदी सड़कें और फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए पूरी तरह से सुगम और बाधा रहित हैं। इस सूची में बेंगलुरु 25.9 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि हैदराबाद 15.1 फीसदी के साथ तीसरे और चेन्नई 13.9 फीसदी के साथ चौथे स्थान पर काबिज है। सर्वे के दौरान लखनऊ के कुल 346 फुटपाथों का गहन निरीक्षण किया गया, जिनमें से 97 फुटपाथ उत्कृष्ट स्थिति में पाए गए।

इस रैंकिंग में दिल्ली जैसे महानगरों को काफी पीछे छोड़ दिया गया है, जो सूची में आठवें स्थान पर रहा। लखनऊ की यह सफलता शहर में बीते कुछ वर्षों में किए गए बुनियादी ढांचे के सुधारों को दर्शाती है, विशेषकर पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए किए गए निर्माण कार्यों को।

किन इलाकों ने बदली शहर की तस्वीर

लखनऊ को यह गौरव दिलाने में शहर के प्रमुख इलाकों की भूमिका अहम रही है। रिपोर्ट में विशेष रूप से अंबेडकर पार्क रोड, लोहिया पथ, इंदिरा नगर और गोमती नगर जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन इलाकों में फुटपाथों की बेहतर बनावट, पैदल चलने के लिए सुरक्षित मार्ग और सार्वजनिक स्थानों पर दी गई सुविधाओं ने लखनऊ को देश के अन्य शहरों की तुलना में अधिक पैदल-अनुकूल बनाया है।

इन क्षेत्रों में पैदल चलने वालों के लिए व्यवस्थित रास्ते और हरित मार्ग (ग्रीन कॉरिडोर) विकसित किए गए हैं, जिससे न केवल यातायात का दबाव कम हुआ है, बल्कि आम नागरिकों के लिए आवागमन भी सुगम हुआ है। यह मॉडल अब अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

प्रशासन की भविष्य की प्राथमिकताएं

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष प्रथेमेश कुमार ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य लखनऊ को एक सुरक्षित और सुविधाजनक शहर के रूप में विकसित करना है। उन्होंने बताया कि शहर में फुटपाथों के सुदृढ़ीकरण, हरित मार्गों के विस्तार और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम निरंतर जारी है।

प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि भविष्य की शहरी नियोजन परियोजनाओं में पैदल चलने वालों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। एलडीए की योजना आने वाले समय में शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के पैदल-अनुकूल बुनियादी ढांचे का विस्तार करने की है, ताकि लखनऊ की इस रैंकिंग को न केवल बरकरार रखा जा सके, बल्कि इसे और अधिक बेहतर बनाया जा सके।

यह रिपोर्ट शहरी नियोजन में पैदल यात्रियों की जरूरतों को शामिल करने की महत्ता को रेखांकित करती है। लखनऊ की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, तो महानगरों में भी पैदल चलने के लिए सुरक्षित और सुखद वातावरण तैयार किया जा सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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