कानपुर में सतीश महाना के बयान पर बवाल: कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जमकर हुई धक्का-मुक्की
Kanpur Ramadevi BJP Congress clash over Satish Mahana statement. Latest political updates. कानपुर में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के चंदा चोरी संबंधी बयान को लेकर शुक्रवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया था। रामादेवी चौराहे पर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

कानपुर में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा दिए गए 'चंदा चोरी' संबंधी बयान ने शुक्रवार को राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। इस बयान के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रामादेवी चौराहे पर प्रदर्शन किया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए, जिससे वहां भारी हंगामा और धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़े हालात
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने सतीश महाना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी बीच, मौके पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया और सरकार व विधानसभा अध्यक्ष के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। स्थिति तब और बिगड़ गई जब दोनों पक्षों के बीच पोस्टर जलाने और धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महाराजपुर विधानसभा से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी धर्मराज चौहान और उनके बेटे को हिरासत में ले लिया। इसके बाद कांग्रेस के महानगर जिलाध्यक्ष पवन गुप्ता अपने समर्थकों के साथ चकेरी थाने पहुंचे। लंबी बातचीत और प्रक्रिया के बाद, शुक्रवार देर शाम शांति भंग की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
कांग्रेस का आरोप: पुलिस की भूमिका पर सवाल
शनिवार को कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत करेंगे। शुक्ला का आरोप है कि कांग्रेस कार्यकर्ता संवैधानिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचकर अभद्रता की और मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं के हाथों में डंडे थे, बावजूद इसके पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही कार्रवाई की।
महानगर जिलाध्यक्ष पवन गुप्ता ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब वे अपने साथियों का हाल जानने थाने पहुंचे, तो वहां भी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया। कांग्रेस का तर्क है कि प्रदर्शन की अनुमति न होने का हवाला देकर उन्हें निशाना बनाया गया, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं को खुली छूट दी गई।
भाजपा का पक्ष: स्वागत कार्यक्रम में थे कार्यकर्ता
दूसरी ओर, भाजपा के दक्षिण जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा कार्यकर्ता किसी विरोध के उद्देश्य से वहां नहीं गए थे। उस दिन भाजपा पिछड़ा मोर्चा और अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों का स्वागत कार्यक्रम निर्धारित था, जिसके लिए कार्यकर्ता पहले से ही वहां मौजूद थे।
भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेसियों द्वारा की गई नारेबाजी का जवाब केवल नारेबाजी से दिया गया। डंडे होने के आरोपों पर उन्होंने सफाई दी कि वे डंडे नहीं, बल्कि पार्टी के झंडे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की मंशा केवल अपने पदाधिकारियों का स्वागत करना था, न कि किसी विवाद को जन्म देना।
आगे की स्थिति
फिलहाल, इस घटना के बाद कानपुर की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस ने इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाने की चेतावनी दी है, जबकि भाजपा ने इसे एक सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बताया है। पुलिस प्रशासन अब मामले की गंभीरता को देखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
