सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने पर सियासी घमासान, आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार को घेरा
Delhi Jantar Mantar Sonam Wangchuk hunger strike police action protest updates. दिल्ली में 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने और युवाओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने सरकार के इस कदम की तीखे शब्दों में आलोचना करते हुए इसे तानाशाही करार दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की हिरासत के बाद बढ़ा सियासी तनाव
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनशन कर रहे प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हटाए जाने की घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल ले जाने और उनके समर्थकों के साथ हुई कथित बदसलूकी पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता का इतना अहंकार उचित नहीं है। केजरीवाल ने तर्क दिया कि सरकार को आंदोलन को कुचलने के बजाय सोनम वांगचुक की मांगों पर संवाद करना चाहिए था।
केजरीवाल और संजय सिंह का सरकार पर तीखा हमला
अरविंद केजरीवाल ने घटना का विवरण देते हुए कहा कि पुलिस ने सादे कपड़ों में आकर सोनम वांगचुक के साथ अनुचित व्यवहार किया और उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। केजरीवाल ने कहा कि ये युवा देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना सरकार की विफलता दर्शाता है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि सरकार 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद मार्च' से डरी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि 59 वर्षीय सोनम वांगचुक देश के करोड़ों युवाओं की आवाज बन चुके हैं, जो हाल के वर्षों में हुए 93 पेपर लीक मामलों से प्रभावित हुए हैं। संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 21 दिनों तक अनशन पर बैठे वांगचुक से बातचीत करने का कोई प्रयास नहीं किया।
संजय सिंह ने आगे कहा कि सरकार ने जानबूझकर पुलिस प्रशासन में बदलाव किया ताकि इस आंदोलन को दबाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता का यह अहंकार युवाओं को और अधिक एकजुट करेगा। उन्होंने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे इस आंदोलन को कमजोर न होने दें और सोनम वांगचुक के संघर्ष का समर्थन जारी रखें।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और आगे की स्थिति
सोनम वांगचुक पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर थे। उनके आंदोलन का मुख्य केंद्र देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाना था। इस दौरान दिल्ली में उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तनाव की खबरें भी सामने आई थीं।
फिलहाल, सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। विपक्षी दलों द्वारा सरकार पर लगाए जा रहे इन आरोपों के बीच, केंद्र सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। इस घटनाक्रम ने देश में युवाओं के मुद्दों और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
