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जैसलमेर: सोलर प्लांट में बैटरी स्टोरेज सिस्टम में भीषण धमाके, तीन दिन बाद हरकत में आई पुलिस

Jaisalmer ACME solar plant battery explosion fire incident details. प्लांट के भीतर बने बैटरी स्टोरेज सिस्टम में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बैटरियों में बम के धमाकों की तरह जोरदार आवाजें होने लगीं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.2K
जैसलमेर: सोलर प्लांट में बैटरी स्टोरेज सिस्टम में भीषण धमाके, तीन दिन बाद हरकत में आई पुलिस
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सनावड़ा गांव में सोलर प्लांट में हुआ बड़ा हादसा

राजस्थान के जैसलमेर जिले के सनावड़ा गांव में स्थित एक प्रमुख सोलर कंपनी के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) में भीषण आग लगने का मामला सामने आया है। यह घटना प्लांट के भीतर बने स्टोरेज यूनिट में हुई, जहां बैटरियों के फटने से जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उनकी आवाज दूर तक सुनाई दी, जिससे मौके पर मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई।

हादसे के दौरान प्लांट में मौजूद सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। इस आगजनी में बैटरी मॉड्यूल और अन्य महंगे उपकरण पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं। कंपनी को हुए नुकसान का सटीक आकलन अभी किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि यह एक बड़ी आर्थिक क्षति है।

तीन दिन तक प्रशासन से छिपाई गई घटना

चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी प्रबंधन ने इस गंभीर हादसे की सूचना स्थानीय पुलिस या प्रशासन को नहीं दी। घटना के तीन दिन बाद जब सोशल मीडिया पर आग और धमाकों का वीडियो वायरल हुआ, तब जाकर प्रशासन को इस मामले की जानकारी मिली। इसके बाद सांकड़ा थाना पुलिस हरकत में आई और शुक्रवार को जांच के लिए मौके पर पहुंची।

सांकड़ा थाना प्रभारी रणसिंह सोढ़ा ने बताया कि पुलिस टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया है। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या प्लांट में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, यह घटना 13 या 14 जुलाई के आसपास हुई थी।

दूसरी यूनिट शुरू होने से ठीक पहले हुआ हादसा

यह सोलर प्रोजेक्ट एक्मे सोलर होल्डिंग्स की सहायक कंपनी द्वारा संचालित है। इस परियोजना का पहला चरण जून के अंत में शुरू हो चुका था। हादसे का शिकार हुई यूनिट का दूसरा चरण 17 जुलाई से शुरू होने वाला था, लेकिन उससे ठीक पहले ही यह भीषण आग लग गई। ग्रिड-स्केल बैटरी स्टोरेज सिस्टम का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा को स्टोर कर जरूरत के समय ग्रिड को बिजली उपलब्ध कराना होता है।

पुलिस के अनुसार, राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, तकनीकी खराबी या सुरक्षा चूक के एंगल से मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस अब कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ कर रही है कि घटना की जानकारी तुरंत साझा क्यों नहीं की गई।

जांच का दायरा बढ़ा

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बैटरी स्टोरेज सिस्टम में किसी तकनीकी खामी के कारण धमाके हुए या यह मानवीय भूल का परिणाम था। इलाके में इस घटना के बाद से सुरक्षा व्यवस्था और सोलर प्लांटों के संचालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वे जांच पूरी होने तक सुरक्षा मानकों की समीक्षा करें।

आने वाले दिनों में पुलिस की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो पाएगा कि आग लगने के पीछे की मुख्य वजह क्या थी और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई थी। फिलहाल, इलाके में इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और स्थानीय लोग प्लांट की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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