महाकाल मंदिर में अब हाईटेक होगी दान की जांच: 15 लाख की मशीन से 5 मिनट में पता चलेगी सोने-चांदी की शुद्धता
Mahakaleshwar Temple Ujjain gold donation testing with Caratometer machine for transparency. मंदिर में भक्तों द्वारा श्रद्धाभाव से चढ़ाए जाने वाले सोने और चांदी के आभूषणों के मूल्यांकन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता लाने के लिए समिति अब कैरेटोमीटर मशीन का सहारा लेने जा रही है। इस अत्याधुनिक मशीन के आ जाने से अब दान में मिलने वाले आभूषणों की शुद्धता का सटीकता से तुरंत पता लगाया जा सकेगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या मिलावट की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पारदर्शिता के लिए मंदिर समिति का बड़ा कदम
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले दान को लेकर मंदिर प्रबंध समिति ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित किए जाने वाले सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता की जांच अत्याधुनिक तकनीक से की जाएगी। इसके लिए समिति ने 15 लाख रुपये की लागत से एक हाईटेक 'कैरेटोमीटर' मशीन खरीदी है, जिससे दान प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।
मंदिर की उप प्रशासक एवं डिप्टी कलेक्टर सिम्मी यादव के अनुसार, यह मशीन सीएसआर (CSR) फंड के माध्यम से महाराष्ट्र से मंगवाई गई है। मंदिर परिसर में इस मशीन को स्थापित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और सोमवार से इसके नियमित संचालन की उम्मीद है। इस नई व्यवस्था के साथ महाकाल मंदिर उन चुनिंदा धार्मिक स्थलों की सूची में शामिल हो गया है, जो दान की शुद्धता जांचने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं।
बिना नुकसान पहुंचाए मिलेगी सटीक जानकारी
कैरेटोमीटर मशीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आभूषणों को बिना काटे, घिसे या पिघलाए उनकी शुद्धता की जांच करती है। अक्सर पुराने तरीकों में आभूषणों को परखने के लिए उन्हें नुकसान पहुंच सकता था, लेकिन इस नई तकनीक से आभूषण सुरक्षित रहेंगे। यह मशीन सोने या चांदी के कैरेट और उसमें मौजूद अन्य धातुओं की मात्रा का सटीक ब्योरा मात्र पांच मिनट में प्रदान कर देगी।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब जो भी श्रद्धालु आभूषण दान करेंगे, उनकी जांच दानदाता की उपस्थिति में ही की जाएगी। इससे दान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। जांच के बाद मिलने वाली रिपोर्ट पूरी तरह प्रमाणिक होगी, जिसे मंदिर के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था और बदलाव की आवश्यकता
इससे पहले तक मंदिर में प्राप्त सोने-चांदी के आभूषणों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय सुनार समिति गठित की जाती थी। दान मिलने के बाद उसकी तीन रसीदें काटी जाती थीं और आभूषणों को मंदिर के कोठार में सुरक्षित रखा जाता था। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में होती थी, लेकिन मानवीय आकलन में त्रुटि की संभावना बनी रहती थी।
नई मशीन के लिए मंदिर परिसर में एक विशेष एयर-कंडीशंड कक्ष तैयार किया जा रहा है। इस कक्ष में ही सभी आभूषणों का परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल दान देने वाले भक्तों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति का प्रबंधन भी अधिक वैज्ञानिक और सटीक तरीके से हो सकेगा।
भविष्य की कार्ययोजना
सोमवार से शुरू होने वाली इस नई व्यवस्था के बाद मंदिर समिति दान में मिलने वाली धातुओं के वर्गीकरण और उनके रखरखाव में और अधिक तेजी लाएगी। इस तकनीक के आने से मंदिर के कोठार में जमा होने वाले सोने और चांदी के भंडार का एक डिजिटल और सटीक डेटाबेस तैयार करने में भी मदद मिलेगी, जो भविष्य में ऑडिट और पारदर्शिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
