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सागर: नेशनल हाईवे-44 के पास मिला घायल बाघ, वन विभाग की टीम रेस्क्यू में जुटी

सागर के नेशनल हाईवे-44 पर स्थित गुरुचौपड़ा के पास बरकोटी के जंगल में सड़क किनारे घायल बाघ मिला है। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में राहगीर मौके पर जमा हो गए।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

3 नवंबर 20263 मिनट पढ़ें
सागर: नेशनल हाईवे-44 के पास मिला घायल बाघ, वन विभाग की टीम रेस्क्यू में जुटी
मूल स्रोत

नेशनल हाईवे के किनारे मिला घायल बाघ

सागर जिले में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित गुरुचौपड़ा के पास बरकोटी के जंगलों में एक बाघ के घायल अवस्था में मिलने से हड़कंप मच गया है। सोमवार को जब राहगीरों ने बाघ को सड़क किनारे बैठे देखा, तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को दी। बाघ की शारीरिक स्थिति को देखकर यह स्पष्ट हो रहा था कि वह चलने में असमर्थ है और दर्द से जूझ रहा है।

बाघ को सड़क किनारे बैठे देख मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों और राहगीरों की भीड़ जुट गई। भीड़ को देखकर बाघ घबरा गया और पास ही मौजूद पत्थरों की ओट में जाकर छिप गया। लोगों की मौजूदगी के कारण बाघ के व्यवहार में भी बदलाव देखा गया, जिसके बाद वन विभाग ने लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।

वाहन की चपेट में आने की आशंका

प्राथमिक अनुमान के अनुसार, बाघ के घायल होने का कारण किसी तेज रफ्तार वाहन की टक्कर हो सकता है। चूंकि यह क्षेत्र नेशनल हाईवे-44 से सटा हुआ है और सड़क के दोनों ओर घना जंगल है, इसलिए वन्यजीवों का अक्सर सड़क पार करना खतरनाक साबित होता है। हालांकि, वन विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है कि बाघ को चोट कैसे लगी।

क्षेत्र में वन्यजीवों के साथ सड़क दुर्घटनाओं का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2024 में इसी बरकोटी घाटी और गुरुचौपड़ा के आसपास एक तेंदुए की वाहन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। इस घटना ने एक बार फिर हाईवे से सटे जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बुलाई गई विशेषज्ञ टीम

सूचना मिलते ही गौरझामर वन परिक्षेत्र की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और बाघ की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। बाघ की गंभीर स्थिति को देखते हुए वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से एक विशेष रेस्क्यू दल को मौके पर बुलाया है। यह टीम बाघ को सुरक्षित बाहर निकालने और उसे आवश्यक चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए काम कर रही है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ के पैरों में गंभीर चोट होने की आशंका है, जिसके कारण वह ठीक से चल नहीं पा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य बाघ को बिना और अधिक तनाव दिए सुरक्षित स्थान पर ले जाना है ताकि उसका इलाज शुरू किया जा सके। फिलहाल, वन विभाग की टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है ताकि बाघ को किसी भी प्रकार की बाहरी परेशानी न हो।

वन्यजीवों की सुरक्षा पर बढ़ा दबाव

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। हाईवे पर वाहनों की तेज रफ्तार और वन्यजीवों के रिहायशी या सड़क मार्ग पर आने के कारण अक्सर ऐसी दुखद घटनाएं सामने आती हैं। वन विभाग अब इस बात पर भी विचार कर रहा है कि भविष्य में ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के लिए क्या अतिरिक्त उपाय किए जा सकते हैं।

फिलहाल, रेस्क्यू टीम का पूरा ध्यान बाघ को सुरक्षित पकड़ने पर है। बाघ की स्थिति और उसके उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे जंगल के इस हिस्से में अनावश्यक भीड़ न लगाएं और विभाग के निर्देशों का पालन करें ताकि रेस्क्यू कार्य में कोई बाधा न आए।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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