ग्वालियर हादसा: डॉक्टर बनने का सपना लिए दुनिया से गया पवन, पीछे छोड़ गया कर्ज और बिलखते माता-पिता
मैंने अपना मकान गिरवी रख दिया, दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती की, ताकि मेरा बेटा डॉक्टर बन सके। सोचा था, पवन पढ़-लिखकर बड़ा डॉक्टर बनेगा तो हमारा बुढ़ापा संवर जाएगा।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

डॉक्टर बनने का सपना और कर्ज का बोझ
ग्वालियर के विद्याराम राठौर के लिए 17 अक्टूबर की रात उनके जीवन का सबसे काला अध्याय बनकर आई। उनका 21 वर्षीय बेटा पवन, जो बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहा था, अब उनके बीच नहीं है। विद्याराम ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपना मकान गिरवी रख दिया था और दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती कर रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि पवन की पढ़ाई पूरी होते ही उनके दिन फिर जाएंगे, लेकिन एक बेकाबू ट्रक ने न केवल पवन की जान ली, बल्कि परिवार के सारे सपने भी चकनाचूर कर दिए।
पवन उस रात अपने दोस्तों के साथ शीतला माता मंदिर दर्शन के लिए गया था। पिता के अनुसार, पवन की मां ने उसे जाने से मना किया था, लेकिन वह जिद कर बैठा। परिवार को क्या पता था कि यह जिद उसके जीवन का आखिरी सफर साबित होगी। मंदिर के पास पहुंचते ही चीनौर की ओर से आए एक बेकाबू ट्रक ने उसे कुचल दिया। पवन की मौत ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद से ही परिवार में गहरा आक्रोश है। पवन के भाई विशाल का कहना है कि जिस रास्ते पर यह हादसा हुआ, वहां भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित था। इसके बावजूद ट्रक वहां तक कैसे पहुंचा, यह एक बड़ा सवाल है। परिजनों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते नो-एंट्री का पालन कराया होता, तो पवन समेत 16 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने इस घटना को महज हादसा नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही करार दिया है।
विशाल ने बताया कि घटनास्थल पर रास्ता बहुत संकरा है और वहां से इतने बड़े ट्रक का गुजरना ही अपने आप में संदिग्ध है। सीसीटीवी फुटेज में भी यह देखा गया है कि हादसे से पहले भी एक ट्रक वहां से गुजरा था। परिवार ने मांग की है कि इस मामले में हत्या का केस दर्ज किया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती घर का गिरवी रखा कर्ज चुकाने की है।
मजिस्ट्रियल जांच और भविष्य की चिंता
प्रशासन ने इस भीषण हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है, जिन्हें 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करनी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी वाहनों को प्रवेश कैसे मिला और इसके पीछे किसकी मिलीभगत थी। इस बीच, ₹200 लेकर ट्रक को एंट्री देने की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
पवन के पिता विद्याराम अब सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बड़े बेटे को नौकरी मिल जाए तो वे किसी तरह अपना कर्ज चुका पाएंगे। जिस बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए उन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी थी, उसके जाने के बाद अब उनके जीवन का कोई मकसद नहीं बचा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी है।
17 अक्टूबर की रात करीब 1:30 बजे हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हुई और 41 लोग घायल हुए। मंदिर परिसर के बाहर मची इस अफरा-तफरी ने ग्वालियर के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। अब सभी की निगाहें मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर उस रात सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
पवन के जाने के बाद घर में सन्नाटा पसरा है। उसकी डॉक्टर की ड्रेस और तस्वीरें अब केवल यादों का हिस्सा बनकर रह गई हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार, जिसने अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष किया था, आज एक ऐसी स्थिति में खड़ा है जहां से वापसी का रास्ता बहुत कठिन है। प्रशासन की जांच और सरकार की मदद ही अब इस परिवार के लिए एकमात्र सहारा बची है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!