विदिशा: रिटायर्ड अकाउंटेंट को 23 दिन तक रखा 'डिजिटल अरेस्ट', सीबीआई का डर दिखाकर ठगे 70 लाख
तारीख- 5 अक्टूबर 2026। समय सुबह 9 बजे।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

23 दिनों तक घर में कैद रहे बुजुर्ग दंपती
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक हैरान कर देने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहाँ बिजली कंपनी के 70 वर्षीय रिटायर्ड अकाउंटेंट प्रदीप कपाड़े को बदमाशों ने करीब 23 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा। खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले इन ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर बुजुर्ग से 70 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। इस दौरान दंपती को अपने ही घर में नजरबंद रहना पड़ा और वे किसी से संपर्क नहीं कर सके।
घटना की शुरुआत 5 अक्टूबर की सुबह हुई, जब प्रदीप कपाड़े को एक फोन कॉल आया। कॉलर ने खुद को टेलीकॉम कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए दावा किया कि उनके नाम पर एक फर्जी सिम कार्ड जारी किया गया है, जिसका इस्तेमाल मुंबई में अवैध गतिविधियों के लिए हो रहा है। इसके बाद कॉल को फर्जी पुलिस अधिकारियों और सीबीआई के नाम पर अन्य ठगों को ट्रांसफर कर दिया गया। आरोपियों ने नरेश गोयल केस का हवाला देकर बुजुर्ग को डराया कि उनके पहचान पत्र का इस्तेमाल करोड़ों के अवैध लेनदेन में हुआ है।
वीडियो कॉल के जरिए 24 घंटे निगरानी
ठगों ने दंपती पर इतना दबाव बनाया कि वे 5 से 28 अक्टूबर तक अपने घर से बाहर नहीं निकले। बदमाशों ने वॉट्सएप वीडियो कॉल के जरिए एक नकली कोर्ट की सुनवाई का नाटक भी किया, जिसमें पुलिस की वर्दी पहने लोग और फर्जी जज शामिल थे। बुजुर्ग को निर्देश दिए गए थे कि वे सोते समय भी मोबाइल को चार्जिंग पर लगाकर वीडियो कॉल चालू रखें। उन्हें पड़ोसियों या दूधवाले से बात करने की सख्त मनाही थी और दिन में कई बार 'आई एम सेफ' के मैसेज भेजने के लिए मजबूर किया जाता था।
ठगी का खुलासा तब हुआ जब 28 अक्टूबर को भारतीय स्टेट बैंक ने संदिग्ध लेनदेन के चलते प्रदीप के खाते पर होल्ड लगा दिया। ठगों के कहने पर जब बुजुर्ग बैंक का होल्ड हटवाने सिविल लाइन थाने पहुंचे, तो उनके व्यवहार और घबराहट को देखकर पुलिस को संदेह हुआ। पुलिस ने जब उनके बेटे से संपर्क किया और मोबाइल की जांच की, तो ठगी की पूरी सच्चाई सामने आई। सच्चाई पता चलते ही बुजुर्ग दंपती सदमे में आ गए।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
पुलिस की साइबर टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। जांच में पता चला कि दंपती से कुल 69.27 लाख रुपये की ठगी की गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ठगों के खातों में जमा 28 लाख रुपये को फ्रीज करवा दिया है। पुलिस ने पीड़ित का मोबाइल जब्त कर लिया है और मामले की जांच के लिए पांच विशेष टीमें गठित की हैं, जिनमें से कुछ टीमें राज्य के बाहर भी भेजी गई हैं।
फिलहाल पुलिस कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पीड़ित की शेष राशि वापस दिलाने का प्रयास कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ठगी के प्रति लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती है और न ही किसी को घर में कैद रहने का निर्देश देती है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!