ग्रेटर नोएडा पीएनबी घोटाला: तीन साल तक बैंक सिस्टम में सेंध लगाकर उड़ाए 10 करोड़ से ज्यादा, सीबीआई जांच शुरू
बैंक की ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी पर आरोप है कि उसने अलग-अलग अधिकारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति रकम ट्रांसफर की। सीबीआई ने बैंक की शिकायत पर आठ नामजद आरोपियों और अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-पी स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) का दुरुपयोग कर करीब तीन साल तक ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई। इस मामले में सीबीआई ने बैंक की शिकायत पर आठ नामजद आरोपियों और अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है।
कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम
बैंक की शुरुआती जांच और सीबीआई को दी गई शिकायत के अनुसार, इस पूरे खेल की मुख्य आरोपी बैंक की ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी बताई जा रही है। आरोप है कि उसने बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का अनधिकृत रूप से इस्तेमाल किया। दीपांशी ने न केवल ग्राहकों के खातों से रकम ट्रांसफर की, बल्कि सबूत मिटाने के लिए ट्रांजेक्शन वाउचर भी नष्ट कर दिए। इस सुनियोजित धोखाधड़ी में ग्राहकों के मोबाइल ट्रांजेक्शन अलर्ट को भी बंद कर दिया गया था ताकि उन्हें खाते से पैसे कटने की भनक तक न लगे।
धोखाधड़ी का तरीका बेहद शातिर था। कई मामलों में ग्राहकों की एफडी (FD) में अन्य लोगों को संयुक्त खाताधारक के रूप में जोड़ दिया गया और फिर एफडी को समय से पहले तुड़वाकर रकम को संदिग्ध खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। बैंक की आंतरिक जांच में अब तक 10.24 करोड़ रुपये के अनधिकृत ट्रांजेक्शन की पुष्टि हुई है।
एक शिकायत ने खोली पोल
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब 16 सितंबर 2026 को संगीता नाम की एक ग्राहक अपनी पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंची। उन्होंने अपने खाते में तीन ऐसे ट्रांजेक्शन देखे जो उन्होंने कभी किए ही नहीं थे। जब उन्होंने इस बारे में पूछताछ की, तो आरोपी दीपांशी ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। बाद में जब मामला शाखा प्रमुख तक पहुंचा और वाउचर की जांच की गई, तो वे रिकॉर्ड से गायब मिले। इसके बाद बैंक ने गहन ऑडिट शुरू किया, जिसमें 10 करोड़ से अधिक की हेराफेरी सामने आई।
सीबीआई की एफआईआर में दीपांशी के अलावा आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी को नामजद किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि आशुतोष पाठक का खाता इस पूरी रकम को ठिकाने लगाने का मुख्य केंद्र था। दीपांशी ने ही यह खाता खुलवाया था और अन्य खातों से रकम घुमाकर अंततः इसी खाते में जमा की जाती थी।
अधिकारियों की भूमिका और जांच का दायरा
इस मामले में बैंक के छह वरिष्ठ अधिकारियों की यूजर आईडी भी जांच के दायरे में हैं। इनमें शाखा प्रबंधक, ग्राहक सेवा सहयोगी और अन्य अधिकारी शामिल हैं। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन अधिकारियों की आईडी साझा की गई थी या उनका एक्सेस किसी तकनीकी खामी या मिलीभगत से हासिल किया गया था। बैंक ने स्पष्ट किया है कि अभी भी खातों और लेनदेन का मिलान जारी है, जिससे प्रभावित ग्राहकों की संख्या और घोटाले की कुल राशि बढ़ सकती है।
बैंक ने अब तक 58 प्रभावित ग्राहकों में से 27 लोगों की केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें करीब 13.60 करोड़ रुपये की राशि वापस की है, जबकि शेष 31 ग्राहकों के खातों की जांच जारी है। सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। बैंक के बाहर अब भी खाताधारकों का जमावड़ा लगा है, जो अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंतित हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!