खगड़िया मंडल कारा में 24 घंटे के भीतर दो कैदियों की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
खगड़िया मंडल कारा में 24 घंटे के भीतर दो बंदियों की मौत से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार देर शाम परबत्ता प्रखंड के मड़ैया गांव निवासी चंदन मल्लिक की सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार के खगड़िया मंडल कारा में एक के बाद एक दो कैदियों की मौत ने जेल प्रशासन की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 24 घंटे के भीतर हुई इन दो मौतों से न केवल प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा है, बल्कि मृतक कैदियों के परिजनों ने जेल के भीतर मारपीट और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।
24 घंटे में दो बंदियों ने तोड़ा दम
घटनाक्रम के अनुसार, रविवार देर शाम परबत्ता प्रखंड के मड़ैया गांव निवासी चंदन मल्लिक की सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। चंदन को करीब दो सप्ताह पूर्व ही न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। रविवार की शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इससे पहले, रविवार को ही मानसी थाना क्षेत्र के एक अन्य बंदी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
लगातार 24 घंटे के भीतर हुई इन दो मौतों ने स्थानीय लोगों और परिजनों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। परिजनों का दावा है कि चंदन मल्लिक की मौत सामान्य नहीं है, बल्कि जेल के भीतर उनके साथ मारपीट की गई थी, जिसके कारण उनकी स्थिति गंभीर हुई और अंततः उनकी जान चली गई।
परिजनों और संगठनों की निष्पक्ष जांच की मांग
मृतक के परिजनों ने घटना की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जेल के भीतर कैदी सुरक्षित नहीं हैं, तो यह प्रशासन की बड़ी विफलता है। अस्पताल परिसर में भारी संख्या में जुटे परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है।
इस मामले पर बहिष्कृत हितकारी संगठन के अध्यक्ष संजीव डोम ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महज एक सप्ताह पहले जेल गए व्यक्ति की मौत होना कई संदेह पैदा करता है। उन्होंने खगड़िया एसपी से जेल की गतिविधियों की गहन समीक्षा करने की मांग की है और कहा कि वे इस मामले के हर पहलू की जांच सुनिश्चित कराएंगे।
प्रशासनिक चुप्पी और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक जेल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जेल अधिकारियों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है, जिससे परिजनों का गुस्सा और बढ़ गया है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली संभावित जांच पर टिकी हैं।
जिले में इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जेल की चारदीवारी के भीतर कैदियों की सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं। प्रशासनिक जांच से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन मौतों के पीछे की वास्तविक वजह क्या है और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या हिंसा शामिल है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!