सीवान नगर परिषद का यू-टर्न: 81 सफाईकर्मियों की बर्खास्तगी का आदेश 24 घंटे में वापस
Siwan Nagar Parishad controversy over safai karmi service termination and council decision update. सीवान नगर परिषद में इन दिनों प्रशासनिक निर्णय और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सफाई कर्मियों की सात दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच नगर कार्यपालक पदाधिकारी नीलम गुप्ता द्वारा दैनिक पारिश्रमिक पर कार्यरत 81 सफाई कर्मियों और कुलियों की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सीवान नगर परिषद में प्रशासनिक निर्णयों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल का अभाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। शहर में पिछले कई दिनों से जारी सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच, नगर कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा 81 दैनिक वेतनभोगी सफाईकर्मियों की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, इस विवादित फैसले के महज 24 घंटे के भीतर ही प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
हड़ताल और बर्खास्तगी का घटनाक्रम
सीवान नगर परिषद के सफाईकर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के कारण पूरे शहर में कचरे का अंबार लग गया है, जिससे आम नागरिकों को भारी दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तनावपूर्ण स्थिति के बीच, नगर कार्यपालक पदाधिकारी नीलम गुप्ता ने एक आदेश जारी कर 81 दैनिक पारिश्रमिक पर कार्यरत सफाईकर्मियों और कुलियों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थी।
प्रशासनिक आदेश में तर्क दिया गया था कि इन कर्मियों का नियोजन बिना विधिवत पद सृजन के किया गया था। साथ ही, नगर परिषद में आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी होने का हवाला देते हुए इन कर्मियों की आवश्यकता न होने की बात कही गई थी। विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन न होने का आधार बनाकर यह कठोर निर्णय लिया गया था।
24 घंटे में पलटा फैसला
बर्खास्तगी का आदेश जारी होते ही प्रभावित कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद ने आनन-फानन में एक विशेष बैठक बुलाई। इस बैठक में वार्ड पार्षदों ने सर्वसम्मति से सफाईकर्मियों की सेवा समाप्त करने वाले आदेश को निरस्त करने का निर्णय लिया। महज एक दिन के भीतर लिए गए इस यू-टर्न ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आखिर नगर परिषद का संचालन किसके निर्देशों पर हो रहा है। यदि प्रशासनिक अधिकारी का निर्णय नियमसंगत था, तो उसे 24 घंटे के भीतर वापस क्यों लिया गया? और यदि वह निर्णय गलत था, तो उसे जारी करने से पहले विचार क्यों नहीं किया गया? यह स्थिति नगर परिषद की निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्पष्ट कमी को दर्शाती है।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे प्रकरण ने आम जनता के बीच जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच के समन्वय को लेकर संशय पैदा कर दिया है। एक तरफ शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर लिए जा रहे अस्थिर फैसले स्थिति को और अधिक जटिल बना रहे हैं। जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या नगर परिषद के पास सफाई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की कोई ठोस कार्ययोजना है या फिर यह केवल तात्कालिक निर्णयों के भरोसे चल रहा है।
फिलहाल, 81 कर्मियों की बर्खास्तगी रद्द होने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सफाईकर्मी अपनी हड़ताल वापस लेंगे या फिर शहर को अभी और दिनों तक गंदगी के बीच रहना पड़ेगा। नगर परिषद प्रशासन के लिए अब चुनौती केवल सफाई व्यवस्था बहाल करना ही नहीं, बल्कि अपनी प्रशासनिक साख को बचाए रखना भी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
