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प्रतापगढ़ मंडी में अव्यवस्थाओं का अंबार: किसानों ने प्रशासन को दिया सात दिन का अल्टीमेटम

Pratapgarh Mandi Kisan protest 7-day ultimatum against disorganization. Bhartiya Kisan Sangh demands solutions. प्रतापगढ़ कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों ने भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। किसानों ने मंडी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 304
प्रतापगढ़ मंडी में अव्यवस्थाओं का अंबार: किसानों ने प्रशासन को दिया सात दिन का अल्टीमेटम
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राजस्थान के प्रतापगढ़ स्थित कृषि उपज मंडी में व्याप्त कुप्रबंधन और बदहाली के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में किसानों ने मंडी परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि मंडी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव और व्यापारियों द्वारा किया जा रहा अतिक्रमण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नीलामी डोम पर अवैध कब्जा और जलभराव की समस्या

प्रदर्शनकारी किसानों ने सबसे प्रमुख मुद्दा नीलामी डोम के दुरुपयोग का उठाया है। आरोप है कि किसानों के लिए बनाए गए इन डोमों का इस्तेमाल व्यापारी अपने निजी माल के भंडारण के लिए कर रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज रखने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा, बरसात के मौसम में इन डोमों में जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है। पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण किसानों को अपनी फसल कीचड़ और पानी के बीच रखनी पड़ती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मंडी परिसर में गंदगी और मच्छरों का प्रकोप भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। किसानों का कहना है कि यहां न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही बैठने के लिए कोई उपयुक्त स्थान। किसान भवन की स्थिति भी जर्जर बनी हुई है, जिससे दूर-दराज से आने वाले किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन को सख्त चेतावनी

भारतीय किसान संघ के जिला सह प्रचार प्रमुख सागर प्रजापत ने बताया कि मंडी प्रशासन को इन समस्याओं के समाधान के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर मंडी परिसर से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और जलभराव व स्वच्छता जैसी बुनियादी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो किसान उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

जिला बीमा एवं अनुदान प्रमुख दिलखुश पाटीदार ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना मंडी प्रशासन का प्राथमिक कर्तव्य है। वहीं, संभाग मंडी विपणन सदस्य बाबूलाल गायरी ने स्पष्ट किया कि नीलामी डोमों पर किसी भी प्रकार का निजी भंडारण स्वीकार्य नहीं है और इन्हें तुरंत खाली कराया जाना चाहिए।

अधिकारी ने दिया सुधार का आश्वासन

किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने मंडी अधिकारी उज्ज्वल जैन से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसानों की नाराजगी को देखते हुए मंडी अधिकारी ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और सात दिनों के भीतर व्यवस्थाओं में सुधार लाने का लिखित आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जल निकासी और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

हालांकि, किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आश्वासन केवल कागजी नहीं होना चाहिए। यदि सात दिन की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रहती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मंडी प्रशासन की होगी। किसान संघ ने चेतावनी दी है कि भविष्य में होने वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन की रणनीति प्रशासन के रवैये पर निर्भर करेगी।

प्रतापगढ़ मंडी में किसानों का यह प्रदर्शन कृषि विपणन व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर एक बड़ा संकेत है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन सात दिनों के भीतर इन समस्याओं का समाधान कर पाता है या फिर किसानों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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