पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, विदेश मंत्रालय ने फिर किया स्पष्ट
केंद्र सरकार ने एक बार फिर से कहा है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के मुताबिक भारत सरकार देश से बाहर यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट जारी करता है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान इस बात पर जोर दिया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जिसे पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है।
क्या है पासपोर्ट का कानूनी आधार?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय नागरिकों को देश से बाहर यात्रा करने की सुविधा प्रदान करना है। यह दस्तावेज पूरी तरह से सत्यापन और जांच प्रक्रिया के बाद ही जारी किया जाता है। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि देश की कुल आबादी के 8 प्रतिशत से भी कम लोगों के पास वर्तमान में पासपोर्ट उपलब्ध है। यह स्पष्ट किया गया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के प्रावधानों के तहत ही इसे जारी करने की प्रक्रिया संचालित होती है।
इससे पहले भी 24 जून को 'पासपोर्ट सेवा दिवस' के अवसर पर मंत्रालय ने इसी तरह का रुख अपनाया था। यह चर्चा तब तेज हुई थी जब चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) में पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में उपयोग करने को लेकर सवाल उठाए गए थे। मंत्रालय ने 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कानूनी रूप से पासपोर्ट को नागरिकता का एकमात्र सबूत नहीं माना जा सकता।
विपक्ष के सवाल और सरकार का रुख
सरकार के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाया है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज मान्य है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस तरह के बयानों के जरिए उन लोगों की नागरिकता पर संदेह पैदा करने की कोशिश कर रही है जो राजनीतिक रूप से असहमत हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट अधिनियम के तहत जनहित में विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार गैर-भारतीय नागरिकों को भी यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है। यही कारण है कि इसे नागरिकता का अंतिम आधार नहीं माना जाता। नागरिकता का निर्धारण पूरी तरह से 'नागरिकता अधिनियम, 1955' के तहत होता है, जो पासपोर्ट कानून से अलग प्रक्रिया है।
पहचान पत्र बनाम नागरिकता का प्रमाण
भारत में आधार, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बनाए गए हैं। आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले स्पष्ट किया है कि यह केवल पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं। इसी तरह, पासपोर्ट केवल राष्ट्रीयता और यात्रा के लिए एक वैध पहचान पत्र के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रीयता और नागरिकता के बीच का अंतर यह है कि राष्ट्रीयता आपकी पहचान बताती है, जबकि नागरिकता आपके कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करती है।
पासपोर्ट रद्द होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई है। नागरिकता समाप्त करने की प्रक्रिया एक जटिल कानूनी प्रक्रिया है, जबकि पासपोर्ट को सुरक्षा कारणों, गलत जानकारी देने या कानूनी कार्रवाई के चलते निलंबित किया जा सकता है। सरकार ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवाओं का विस्तार हुआ है और अब ई-पासपोर्ट की सुविधा भी बड़े पैमाने पर दी जा रही है।
वर्तमान में भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक एकल दस्तावेज नहीं है। नागरिकता का निर्धारण उस व्यक्ति के नागरिकता कानून के तहत रिकॉर्ड और उसे प्राप्त करने के तरीके पर निर्भर करता है। सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले पहचान पत्र नागरिकता की कानूनी स्थिति को बदलने या साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!