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अलीगढ़: ड्यूटी के दौरान रील बनाना पड़ा महंगा, नगर निगम की महिला कर्मचारी निलंबित

Aligarh municipal corporation staff suspended for recording viral reel video at shelter home. अलीगढ़ में ड्यूटी के दौरान रील बनाने पर शुक्रवार रात में करीब 11 बजे नगर निगम की महिला कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया। उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.1K
अलीगढ़: ड्यूटी के दौरान रील बनाना पड़ा महंगा, नगर निगम की महिला कर्मचारी निलंबित
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ड्यूटी के दौरान रील बनाने पर सख्त कार्रवाई

अलीगढ़ नगर निगम प्रशासन ने अनुशासनहीनता के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी एक महिला कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई भुजपुरा स्थित शेल्टर होम में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ की गई है। आरोप है कि कर्मचारी ने अपनी ड्यूटी के दौरान सरकारी परिसर में रील बनाई थी, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।

घटना का संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने शुक्रवार रात करीब 11 बजे निलंबन के आदेश जारी किए। इस मामले ने सरकारी कार्यालयों में सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग और कार्यस्थल की मर्यादा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी समय का उपयोग व्यक्तिगत मनोरंजन के लिए करना नियमों का सीधा उल्लंघन है।

15 जुलाई को सामने आया था वीडियो

विवाद की शुरुआत 15 जुलाई 2026 को हुई, जब शेल्टर होम के भीतर रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक हुआ। वीडियो में कर्मचारी ड्यूटी के दौरान रील बनाती हुई दिखाई दे रही थी। जैसे ही यह वीडियो उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, नगर निगम प्रशासन ने मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए।

जांच में यह पाया गया कि कर्मचारी ने अपने सरकारी दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरती है और संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। इस रिपोर्ट के आधार पर, नगर आयुक्त ने कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसे प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

विभागीय जांच और भविष्य की कार्रवाई

मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के लिए कर निर्धारण अधिकारी आशीष कुमार सेठ को जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं, तो कर्मचारी के खिलाफ और भी सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सेवा में तैनात हर कर्मचारी का प्राथमिक कर्तव्य जनता की सेवा करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग करना उनकी नौकरी के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

वर्तमान में, नगर निगम प्रशासन इस बात पर जोर दे रहा है कि सरकारी दफ्तरों में काम का माहौल पेशेवर बना रहे। शेल्टर होम जैसे संवेदनशील स्थानों पर, जहां जरूरतमंद लोगों को आश्रय दिया जाता है, वहां इस तरह की हरकतें न केवल नियमों के खिलाफ हैं, बल्कि यह संस्थान की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

आने वाले दिनों में जांच अधिकारी द्वारा सौंपी जाने वाली रिपोर्ट यह तय करेगी कि संबंधित कर्मचारी की सेवा बहाली होगी या उसे और बड़ी विभागीय सजा का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, इस निलंबन के बाद नगर निगम के अन्य कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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