E20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान का कोई सबूत नहीं: नितिन गडकरी
एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने का कोई प्रमाण नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि वैकल्पिक ईंधन से देश का तेल आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों की आय बढ़ेगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर उठ रहे सवालों पर केंद्रीय मंत्री का स्पष्टीकरण
देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने (E20) के निर्णय को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल के उपयोग से गाड़ियों के खराब होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। गडकरी ने कहा कि 2004 से ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है और अब तक ऐसी कोई शिकायत प्रमाणित नहीं हुई है।
गडकरी ने जोर देकर कहा कि वैकल्पिक ईंधन का उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोलियम आयात करता है, जिसे कम करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि परिवहन क्षेत्र दिल्ली के प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा है, और एथेनॉल जैसे स्वच्छ ईंधन से इसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
माइलेज और तकनीकी पहलुओं पर स्थिति साफ
ईंधन के माइलेज को लेकर आम उपभोक्ताओं की चिंताओं पर मंत्री ने कहा कि माइलेज पूरी तरह से सड़क की स्थिति और ट्रैफिक पर निर्भर करता है। हालांकि एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, जिससे मामूली अंतर आ सकता है, लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के आने से यह समस्या भी दूर हो जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि एथेनॉल न केवल सस्ता है, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी सहायक है।
एथेनॉल की उपलब्धता पर उन्होंने जानकारी दी कि देश की उत्पादन क्षमता अब 1750-1800 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है, जो हमारी 1450 करोड़ लीटर की वार्षिक आवश्यकता से अधिक है। एथेनॉल का उत्पादन अब केवल गन्ने तक सीमित नहीं है, बल्कि मक्का, टूटे चावल, पराली और बांस जैसे स्रोतों से भी किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के कदम
सरकार का लक्ष्य केवल लागत घटाना नहीं, बल्कि भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं, लेकिन एथेनॉल का उपयोग विदेशी मुद्रा बचाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने का एक बड़ा माध्यम है। उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां दशकों से एथेनॉल का सफल उपयोग हो रहा है।
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है। अब सरकार का अगला लक्ष्य 2030 तक इसे 30 प्रतिशत तक ले जाने का है। इस नीति से देश ने अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत की है।
सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर प्रतिबद्धता
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों पर गडकरी ने कहा कि वे आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सड़कों की जांच के लिए एक्सरे जैसी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है और खराब काम करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है। जल्द ही ठेकेदारों की रेटिंग भी सार्वजनिक की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
अंत में, अपनी कार्यशैली पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे सिद्धांतों की राजनीति में विश्वास रखते हैं। उनके लिए राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का एक जरिया है। उन्होंने दोहराया कि देश के विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए कड़े और दूरदर्शी निर्णय लेना आवश्यक है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!