नवादा: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एलआईसी एजेंट से 25.50 लाख की ठगी, छह दिनों तक रखा निगरानी में
नवादा में साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर एलआईसी एजेंट किशोरी प्रसाद गुप्ता(69) से 25 लाख 50 हजार रुपए की ठगी कर ली। आरोप है कि अपराधियों ने खुद को सीबीआई, पुलिस और सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को छह दिनों तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

डिजिटल अरेस्ट का खौफ: छह दिनों तक बंधक बने रहे बुजुर्ग
बिहार के नवादा जिले में साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग एलआईसी एजेंट को अपना निशाना बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की है। पोस्टमार्टम रोड निवासी 69 वर्षीय किशोरी प्रसाद गुप्ता को अपराधियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। यह सिलसिला करीब छह दिनों तक चला, जिसके दौरान बुजुर्ग को लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया।
पीड़ित के अनुसार, अपराधियों ने खुद को सीबीआई, पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी के रूप में पेश किया। उन्हें डराया गया कि वे एक गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं और उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता है। अपराधियों ने बुजुर्ग पर इतना दबाव बनाया कि उन्हें खाना खाने और सोने के दौरान भी अपना कैमरा चालू रखने के लिए मजबूर किया गया, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें।
मनी लॉन्ड्रिंग का झांसा और पैसों की वसूली
ठगी की शुरुआत 9 अक्टूबर को एक फोन कॉल से हुई। अपराधियों ने पीड़ित को बताया कि उनके बैंक खाते का उपयोग अवैध गतिविधियों में हो रहा है। खुद को सीबीआई का एसपी बताने वाले व्यक्ति ने उन्हें डराया कि अगर वे अपनी जमा पूंजी को जांच के लिए बताए गए खातों में ट्रांसफर नहीं करते हैं, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अपराधियों ने यह भरोसा भी दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे और उन्हें जमानत मिल जाएगी।
अपराधियों का जाल इतना गहरा था कि चार से पांच लोग अलग-अलग अधिकारियों की भूमिका निभा रहे थे। एक व्यक्ति ने तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से बात कराने का नाटक भी किया। घर में अकेले रह रहे बुजुर्ग पूरी तरह से घबरा गए थे और अपराधियों ने उन्हें किसी को भी इस बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इस डर के कारण उन्होंने 12 से 14 अक्टूबर के बीच तीन किस्तों में कुल 25.50 लाख रुपये अपराधियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
बेटी की सतर्कता से खुला मामला
इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा तब हुआ जब 16 अक्टूबर को पीड़ित की बेटी ने उन्हें फोन किया। बातचीत के दौरान बुजुर्ग ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद उनकी बेटी ने तुरंत इसे साइबर फ्रॉड समझ लिया और उन्हें सतर्क किया। बेटी की सलाह पर पीड़ित ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 22 अक्टूबर को पुलिस ने इस मामले में औपचारिक मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की।
नवादा के साइबर डीएसपी शाहनवाज अख्तर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ठगी गई रकम को लगभग 200 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है। यह दर्शाता है कि अपराधी एक संगठित गिरोह का हिस्सा हैं। पुलिस अब उन सभी बैंक खातों को होल्ड कराने की प्रक्रिया में जुटी है ताकि रकम की रिकवरी की जा सके।
बढ़ते साइबर अपराध और सावधानी की जरूरत
डिजिटल अरेस्ट की यह घटना देश भर में बढ़ रहे साइबर अपराधों की एक कड़ी है। इसमें अपराधी तकनीक का सहारा लेकर लोगों को उनके घरों में ही 'डिजिटल रूप से कैद' कर लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी कभी भी फोन पर वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती है और न ही पैसे की मांग करती है। ऐसी किसी भी कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचित करना चाहिए।
पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर अपनी निजी जानकारी साझा न करें और न ही कोई वित्तीय लेनदेन करें। नवादा पुलिस अब इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की गति तेज कर दी गई है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!