मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों को चुनाव आयोग का एक और मौका, इन 7 राज्यों के वोटर्स को मिलेगी राहत
चुनाव आयोग (EC) ने SIR प्रक्रिया के दौरान छूटे मतदाताओं को नाम जुड़वाने एक और मौका देने का फैसला किया। यह मौका उन मतदाताओं को मिलेगा, जिन्हें एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट (ASDD) के तौर पर रखा गया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का विशेष अवसर
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए नागरिकों को अपना नाम फिर से दर्ज कराने का एक और अवसर देने का निर्णय लिया है। यह सुविधा विशेष रूप से उन मतदाताओं के लिए है जिन्हें एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड या डुप्लिकेट (ASDD) श्रेणी में रखा गया था। इन मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म जारी किए गए थे, लेकिन वे समय पर प्राप्त नहीं हो सके, जिसके कारण उनका नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में शामिल नहीं हो पाया था।
आयोग के इस निर्देश का लाभ दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नागालैंड के निवासियों को मिलेगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा केवल उन्हीं लोगों के लिए है जो पहले से मतदाता सूची का हिस्सा थे और SIR प्रक्रिया के दौरान किसी तकनीकी कारण से बाहर हो गए। जो व्यक्ति पहले कभी भी मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उन्हें इस विशेष प्रक्रिया का लाभ नहीं मिलेगा।
विवाद और सुप्रीम कोर्ट की दखल
हाल ही में दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर काफी विवाद हुआ था। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में लगभग 97.53 लाख नाम शामिल थे, जबकि दिल्ली में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 1.45 करोड़ थी। इस तरह करीब 47.57 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस जल्दबाजी पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग से सवाल किए थे, जिसके बाद आयोग ने अपनी प्रक्रिया में सुधार और तारीखों में बदलाव करने का निर्णय लिया।
विभिन्न राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं कि जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया या जो लोग काम के सिलसिले में बाहर गए हैं, उन्हें अनुपस्थित मानकर सूची से हटा दिया गया। इन शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने अब प्रक्रिया को सरल बनाने का कदम उठाया है ताकि वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहें।
नाम जुड़वाने की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। इसके अलावा, मतदाता स्वयं भी दावा-आपत्ति के दौरान फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इसके लिए आवेदक को अपना आधार कार्ड, पुराना वोटर आईडी और निवास प्रमाण पत्र साथ रखना होगा।
आयोग ने हाल ही में फॉर्म-6 में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की मतदाता सूची का विवरण देने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। आवेदक को अब अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम पुरानी सूची में होने का प्रमाण देने की जरूरत नहीं होगी। यह बदलाव उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जिन्हें पहले जटिल कागजी कार्रवाई के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता था।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 भरने को झूठा शपथ पत्र नहीं माना जाएगा और न ही इसके लिए कोई कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम उन मतदाताओं के लिए है जो पहले से ही सिस्टम का हिस्सा थे। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों में कोई भी पात्र नागरिक मतदान से वंचित न रहे और मतदाता सूची पूरी तरह सटीक और पारदर्शी बनी रहे।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!