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मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी: कैबिनेट बैठक में UCC ड्राफ्ट को मिलेगी मंजूरी

Madhya Pradesh UCC Bill draft approval updates for Uniform Civil Code implementation in MP. शुक्रवार को कटनी में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हिंदू और मुसलमानों के लिए अलग-अलग पर्सनल कानून अब नहीं चलेंगे। अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा?

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.5K
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी: कैबिनेट बैठक में UCC ड्राफ्ट को मिलेगी मंजूरी
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भोपाल में कैबिनेट की अहम बैठक

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। रविवार को भोपाल के जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट बैठक में UCC विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में इसे पेश किए जाने की पूरी संभावना है।

हाल ही में कटनी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य में एक समान कानून व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने बहुविवाह प्रथा पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में वही रह पाएगा जो एक विवाह के नियम का पालन करेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम सामाजिक समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

लिव-इन रिलेशनशिप और पंजीकरण के नियम

प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया में स्थानीय पुलिस और माता-पिता को सूचना दी जाएगी। यदि कोई जोड़ा बिना पंजीकरण के साथ रहता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें तीन महीने तक की जेल का प्रावधान शामिल है। साथ ही, ब्रेकअप की स्थिति में भी पंजीकरण रद्द कराना आवश्यक होगा।

कानून में लिव-इन से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को भी सुरक्षित किया गया है। इन बच्चों को कानूनी रूप से वैध माना जाएगा और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में जन्म से ही समान अधिकार प्राप्त होंगे। इसके अलावा, ब्रेकअप की स्थिति में महिला को भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का अधिकार देने का प्रावधान भी ड्राफ्ट में शामिल है।

उत्तराधिकार और जनजातीय समुदायों को छूट

मध्य प्रदेश का यह ड्राफ्ट काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर आधारित है, जिसे जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने तैयार किया है। हालांकि, इसमें कुछ स्थानीय बदलाव किए गए हैं। उत्तराधिकार से जुड़े जटिल नियमों को सरल बनाते हुए प्रावधानों की संख्या को 100 से घटाकर 30 कर दिया गया है। इसमें बेटियों को बेटों के बराबर संपत्ति का अधिकार देने पर जोर दिया गया है।

राज्य की बड़ी जनजातीय आबादी को ध्यान में रखते हुए, अनुसूचित जनजातियों (ST) और घुमंतू समुदायों को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सरकार का तर्क है कि इन समुदायों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।

धार्मिक परंपराओं पर प्रभाव और भविष्य की राह

सरकार ने स्पष्ट किया है कि UCC का उद्देश्य किसी भी धर्म की धार्मिक परंपराओं या पूजा पद्धति में हस्तक्षेप करना नहीं है। शादी की रस्में, जैसे सात फेरे या निकाह, अपने पारंपरिक तरीके से ही जारी रहेंगी। यह कानून केवल नागरिक अधिकारों, जैसे शादी का पंजीकरण, तलाक की प्रक्रिया और संपत्ति के बंटवारे को सभी के लिए समान बनाने का प्रयास है।

इस ड्राफ्ट को तैयार करने से पहले समिति ने आम जनता से सुझाव मांगे थे, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय रखी। अब विधानसभा में पेश होने के बाद ही इस विधेयक के अंतिम स्वरूप और इसके क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा स्पष्ट हो पाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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