राजस्थान के मेडिकल छात्रों को झटका: सरकारी एमबीबीएस सीटों में इस साल नहीं हुआ कोई इजाफा
नेशनल मेडिकल कमिशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है। देश के कई राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ी है, लेकिन राजस्थान में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान के मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए निराशाजनक खबर
नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है। इस वर्ष जारी किए गए आंकड़ों ने राजस्थान के उन हजारों छात्र-छात्राओं को बड़ा झटका दिया है, जो सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की तैयारी कर रहे थे। देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां सरकारी एमबीबीएस सीटों की संख्या में वृद्धि की गई है, वहीं क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान को इस बार एक भी नई सीट नहीं मिली है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एनएमसी द्वारा जारी आंकड़ों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि राजस्थान में सरकारी एमबीबीएस सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्य के 33 सरकारी मेडिकल संस्थानों में पहले भी कुल 4,480 सीटें उपलब्ध थीं और इस सत्र में भी यह संख्या यथावत बनी हुई है। इस स्थिरता के कारण देश की कुल सरकारी सीटों में राजस्थान की हिस्सेदारी मात्र 7 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गई है।
अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान की स्थिति
देशभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 441 सरकारी मेडिकल संस्थान हैं, जिनमें एमबीबीएस की कुल 63,296 सीटें उपलब्ध हैं। अन्य बड़े राज्यों की तुलना में राजस्थान काफी पीछे नजर आता है। महाराष्ट्र 42 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ 6,000 सीटों के साथ देश में शीर्ष पर है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 49 सरकारी मेडिकल संस्थान हैं, जिनमें 5,700 सीटें उपलब्ध हैं। तमिलनाडु भी 37 संस्थानों के साथ 5,349 सीटों के साथ राजस्थान से आगे बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर देश के 19 राज्यों ने अपने मेडिकल बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए सीटों में इजाफा किया है, वहीं राजस्थान में सीटों का ग्राफ स्थिर रहने से यहां के नीट अभ्यर्थियों के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। सीटों में बढ़ोतरी न होने का सीधा असर राज्य स्तरीय काउंसलिंग प्रक्रिया पर पड़ेगा।
काउंसलिंग में बढ़ेगा प्रतिस्पर्धा का दबाव
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सीटों में इजाफा न होने के कारण इस बार राज्य स्तरीय काउंसलिंग में मुकाबला बेहद कड़ा और चुनौतीपूर्ण होने की उम्मीद है। सीटों की सीमित संख्या और छात्रों की बढ़ती संख्या के बीच कट-ऑफ पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। अभ्यर्थियों को अब अपनी रणनीति और अधिक सतर्कता के साथ तय करनी होगी।
राजस्थान के मेडिकल शिक्षा ढांचे में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे छात्रों और अभिभावकों के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या में लंबे समय से हो रही मांग के बावजूद, इस सत्र में किसी भी प्रकार की वृद्धि न होना राज्य की स्वास्थ्य शिक्षा नीति पर सवाल खड़े कर रहा है।
आने वाले समय में राज्य सरकार और संबंधित विभागों की ओर से मेडिकल सीटों के विस्तार को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, वर्तमान सत्र के लिए उपलब्ध सीटों के आधार पर ही छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेना होगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
