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पूर्णिया के भाई-बहन ने नीट परीक्षा में लहराया परचम, पहले ही प्रयास में आयुष ने हासिल की शानदार रैंक

जुलाई को री-नीट (NEET-UG) के रिजल्ट सामने आए। पूर्णिया शहर की शिवाजी कॉलोनी निवासी चंदन कुमार के बेटे आयुष आर्य और बेटी इवाना आर्य ने एक साथ नीट परीक्षा में सफलता पाई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
पूर्णिया के भाई-बहन ने नीट परीक्षा में लहराया परचम, पहले ही प्रयास में आयुष ने हासिल की शानदार रैंक
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पूर्णिया के मेधावी भाई-बहन ने नीट में पाई सफलता

बिहार के पूर्णिया जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां शिवाजी कॉलोनी निवासी चंदन कुमार के दो बच्चों, आयुष आर्य और इवाना आर्य ने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में एक साथ सफलता प्राप्त की है। 16 जुलाई को घोषित हुए री-नीट परिणामों में इन दोनों भाई-बहनों ने अपनी मेहनत और लगन का लोहा मनवाया है।

आयुष आर्य ने अपनी पहली ही कोशिश में नीट जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 287 हासिल की है। इसके साथ ही जनरल कैटेगरी में उन्होंने 181वीं रैंक प्राप्त की है। आयुष की शैक्षणिक उपलब्धियां यहीं नहीं रुकतीं; उन्होंने जेईई मेन्स में भी 99.21 परसेंटाइल स्कोर किया था, हालांकि डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने जेईई एडवांस्ड की परीक्षा नहीं दी। इसके अलावा, उन्होंने आईईएसआर प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

इवाना की मेहनत और परिवार का समर्पण

आयुष की बहन इवाना आर्य ने भी नीट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4427वीं ऑल इंडिया रैंक और 2071वीं जनरल कैटेगरी रैंक हासिल की है। यह उनकी सफलता का दूसरा प्रयास था। इवाना ने 99.77 परसेंटाइल के साथ अपनी पिछली रैंक में उल्लेखनीय सुधार किया है। इवाना इससे पहले बिहार बोर्ड की स्टेट टॉपरों की सूची में भी शामिल रह चुकी हैं।

इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का त्याग भी एक बड़ी वजह है। पिता चंदन कुमार, जो कैनरा बैंक में सहायक प्रबंधक हैं, ने अपने बच्चों की शिक्षा और बुजुर्ग माता-पिता की सेवा के लिए पिछले 18 वर्षों से पदोन्नति के अवसर को स्वीकार नहीं किया, ताकि वे परिवार के साथ रह सकें। वहीं, उनकी मां अंजू कुमारी ने बच्चों के बेहतर मार्गदर्शन के लिए सरकारी शिक्षक की नौकरी तक छोड़ दी थी।

सोशल मीडिया से दूरी और 10 घंटे की पढ़ाई

सफलता का मूल मंत्र बताते हुए परिवार ने साझा किया कि आयुष और इवाना ने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया और मोबाइल फोन से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। दोनों भाई-बहन रोजाना 8 से 10 घंटे तक पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करते थे। वर्तमान में भी वे अपनी मां के साथ कोटा में रहकर अपनी आगे की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस परिवार में शिक्षा का माहौल पीढ़ियों से रहा है। आयुष और इवाना के दादा डॉ. नंद किशोर यादव पूर्णिया के एक कॉलेज में 27 वर्षों तक प्रिंसिपल रहे और उनकी दादी भी प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थीं। दादा का सपना था कि उनका कोई पोता डॉक्टर बने, जिसे आयुष और इवाना ने आज साकार कर दिखाया है।

दादा का सपना हुआ पूरा

दादा डॉ. नंद किशोर यादव ने बताया कि उन्होंने वर्षों पहले अपने बेटों से डॉक्टर बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन तब वह सपना पूरा नहीं हो सका था। आज अपने पोते-पोती की उपलब्धि पर वे बेहद गौरवान्वित हैं। आयुष ने अपनी इस सफलता के बाद दादा से उपहार के रूप में कार की मांग की है, जो उनके परिवार के लिए एक खुशी का पल है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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